कानपुर में ‘डिग्री माफिया’ का बड़ा खुलासा: 9 राज्यों में फैला था जाल, ₹2.50 लाख तक में बिक रही थीं फर्जी डिग्रियां
कानपुर | 28 feb 2026
उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को खोखला कर रहा था। ‘शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन’ के नाम से चल रहे इस रैकेट ने देशभर के हजारों युवाओं को फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट बांटकर करोड़ों रुपये की ठगी की है।
कैसे हुआ इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश?
कानपुर के किदवई नगर थाना पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की, जिसमें ‘शैलेंद्र’ नाम के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान पुलिस के भी होश उड़ गए जब उन्हें वहां से 14 से अधिक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्रियां, मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और जाली सरकारी मुहरें (Seals) बरामद हुईं।
रेट कार्ड: हर डिग्री की अपनी कीमत
पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि यह गिरोह डिग्री के अनुसार पैसे वसूलता था। इनका नेटवर्क इतना संगठित था कि असली दिखने वाले होलोग्राम तक का इस्तेमाल किया जाता था:
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B.Pharma और D.Pharma: ₹2.50 लाख तक।
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B.Tech और LLB: ₹1.50 लाख तक।
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ग्रेजुएशन (BA/B.Sc): ₹50,000 से ₹75,000।
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हाईस्कूल और इंटर: ₹30,000 से ₹50,000।
SIT करेगी जांच: रडार पर हैं फर्जी डिग्री धारक
कानपुर पुलिस कमिश्नर ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 14 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है।
मुख्य बिंदु: > * जांच अब उन लोगों की ओर मुड़ गई है जिन्होंने इन फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर सरकारी या निजी संस्थानों में नौकरियां हासिल की हैं।
शुरुआती जांच में करीब 10 ऐसे वकीलों के नाम सामने आए हैं जिन्होंने फर्जी LLB डिग्री के आधार पर रजिस्ट्रेशन कराया था।
9 राज्यों तक फैला है कनेक्शन
यह गिरोह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत कुल 9 राज्यों में इनके एजेंट फैले हुए थे, जो भोले-भाले छात्रों और जल्दी कामयाबी चाहने वाले लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
सावधानी बरतें: पुलिस की अपील
कानपुर पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी प्राइवेट संस्थान से डिग्री या मार्कशीट लेते समय संबंधित विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘वेरिफिकेशन’ जरूर करें। शॉर्टकट के चक्कर में फर्जी दस्तावेज लेना आपको जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है।








