पश्चिम बंगाल में सियासी भूचाल: राज्यपाल को धमकी, ED की छापेमारी और ममता बनर्जी का विरोध मार्च
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। एक तरफ राज्यपाल को बम से उड़ाने और जान से मारने की धमकी, तो दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर राज्य बनाम केंद्र का टकराव खुलकर सामने आ गया है। इन घटनाओं ने न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था बल्कि संघीय ढांचे पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
🛑 राज्यपाल को ईमेल से धमकी


पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस को ईमेल के माध्यम से बम से उड़ाने और हत्या की धमकी मिलने के बाद राजभवन की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
- सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है।
- केंद्रीय गृह मंत्रालय को तत्काल सूचना दी गई।
- साइबर सेल धमकी भेजने वाले की पहचान में जुटी है।
राज्यपाल कार्यालय के मुताबिक, धमकी को गंभीरता से लेते हुए हर स्तर पर सुरक्षा समीक्षा की जा रही है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब राज्य और केंद्र के बीच पहले से ही रिश्ते तनावपूर्ण हैं।
🔍 ED की छापेमारी और I-PAC मामला
इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय ने राजनीतिक परामर्श कंपनी I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) से जुड़े कोलकाता के दफ्तर और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की।
- जांच आर्थिक अनियमितताओं और फंडिंग से जुड़े मामलों से संबंधित बताई जा रही है।
- ED ने दस्तावेज़, डिजिटल डेटा और वित्तीय लेन-देन की जांच की।
I-PAC देश की कई प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के लिए रणनीतिक सलाह देती रही है। ऐसे में इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं।
🚩 ममता बनर्जी का पलटवार


ED की कार्रवाई के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में बड़े प्रोटेस्ट मार्च का ऐलान किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
- केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक दुरुपयोग किया जा रहा है।
- विपक्षी शासित राज्यों को निशाना बनाया जा रहा है।
- यह कार्रवाई लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर हमला है।
ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार डरने वाली नहीं है और वे “तानाशाही रवैये” के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगी।
⚖️ कानून-व्यवस्था और सियासी टकराव
राज्यपाल को धमकी और ED की छापेमारी—दोनों घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
- विपक्ष का कहना है कि राज्य सरकार हालात संभालने में नाकाम है।
- वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस इसे केंद्र की साजिश बता रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच बेहद ज़रूरी है, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
🗳️ राजनीतिक असर और आगे की राह
आने वाले समय में इस पूरे घटनाक्रम का असर—
- राज्य- केंद्र संबंधों पर
- आगामी चुनावी समीकरणों पर
- और कानून-व्यवस्था की राजनीति पर साफ दिख सकता है।
राज्यपाल को मिली धमकी एक गंभीर सुरक्षा मुद्दा है, जबकि ED की कार्रवाई कानूनी दायरे में है या नहीं—यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पश्चिम बंगाल की सियासत में उबाल बना हुआ है और देश की नजरें कोलकाता पर टिकी हैं।








