सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘हेट स्पीच’ के हर मामले की निगरानी संभव नहीं, याचिकाकर्ताओं को दी अहम सलाह

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘हेट स्पीच’ के हर मामले की निगरानी संभव नहीं, याचिकाकर्ताओं को दी अहम सलाह
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: ‘हेट स्पीच’ के हर मामले की निगरानी हम नहीं कर सकते

हेट स्पीच यानी नफरती भाषण से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। देशभर में बढ़ रही हेट स्पीच की घटनाओं पर दाखिल एक याचिका की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने कहा कि वह हर घटना की निगरानी नहीं कर सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और हेट स्पीच के मामलों में कार्रवाई करना सरकार, पुलिस और संबंधित संस्थानों की जिम्मेदारी है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि यदि किसी विशेष घटना या भाषण से समस्या है, तो वे पहले पुलिस, राज्य प्रशासन, या संबंधित हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके पास देशभर की हर छोटी-बड़ी घटना को देखने के लिए न तो संसाधन हैं और न ही यह उसकी भूमिका है।


मामला क्या था?

यह सुनवाई उन याचिकाओं पर हुई जिनमें दावा किया गया था कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार हेट स्पीच की घटनाएं हो रही हैं और प्रशासन उन्हें रोकने में विफल रहा है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में निगरानी करे और केंद्र व राज्य सरकारों को कड़ी सजा देने जैसी दिशानिर्देश जारी करे।

हालांकि कोर्ट ने इस पर स्पष्ट टिप्पणी की कि हर घटना के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की जरूरत नहीं है।


सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों की बेंच ने कहा:

  • “देश भर में हेट स्पीच की हजारों घटनाएं होती हैं। हम हर एक की निगरानी नहीं कर सकते।”
  • “इसके लिए कानून मौजूद है और उससे निपटने की जिम्मेदारी प्रशासन की है।”
  • “अगर कोई घटना होती है, तो याचिकाकर्ता स्थानीय पुलिस या हाई कोर्ट से संपर्क करें।”

इस टिप्पणी ने स्पष्ट कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट खुद को हर ऐसी घटना का मॉनिटरिंग बॉडी नहीं बना सकता।


हेट स्पीच क्या है?—कानून में इसकी परिभाषा

भारत में हेट स्पीच की कोई एकल, सीधी परिभाषा नहीं है, लेकिन विभिन्न कानूनों में इससे संबंधित धाराएँ शामिल हैं।

IPC की प्रमुख धाराएं:

  • धारा 153A: धर्म, नस्ल, भाषा के आधार पर वैमनस्य फैलाने पर सजा
  • धारा 295A: धार्मिक भावनाएं आहत करने पर सजा
  • धारा 505: अफवाह और नफरत फैलाने पर दंड

इसके बावजूद, अदालतें कई मामलों में हेट स्पीच की संवैधानिक सीमाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हैं।


कोर्ट ने पुलिस और राज्य सरकारों को क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि राज्यों का कर्तव्य है कि वे हेट स्पीच से जुड़े मामलों पर:

  • तुरंत FIR दर्ज करें
  • समय पर जांच करें
  • दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें
  • रोकथाम के कदम उठाएं

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सुप्रीम कोर्ट लगातार पुलिस को आदेश नहीं दे सकता कि किस मामले में क्या कार्रवाई करनी है।


हाई कोर्ट क्यों हैं पहला विकल्प?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत का संवैधानिक ढांचा ऐसा बनाया गया है कि:

  • हाई कोर्ट्स राज्य विषयों पर तत्काल आदेश दे सकती हैं
  • उनके पास आपात अधिकार (Article 226) है
  • स्थानीय घटनाओं पर वे अधिक प्रभावी तरीके से सुनवाई कर सकती हैं

इसलिए हेट स्पीच जैसे कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में हाई कोर्ट से राहत मिल सकती है।


याचिकाकर्ता क्या चाहते थे?

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि हेट स्पीच के मामले बढ़ रहे हैं और प्रशासन कई बार निष्क्रिय दिखता है।
उन्होंने मांग की:

  • ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी के आदेश
  • सख्त दिशा-निर्देश
  • केंद्र और राज्य को जवाबदेह बनाना
  • देशभर में एक निगरानी तंत्र

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर घटना में हस्तक्षेप करना उसकी प्राथमिक भूमिका नहीं है।


हेट स्पीच के मामलों में सुप्रीम कोर्ट पहले क्या कह चुका है?

पिछले कुछ वर्षों में सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है।
अदालत ने कहा था:

  • हेट स्पीच “किसी भी समाज में असहिष्णुता का चेहरा” है
  • इससे हिंसा और सामाजिक तनाव बढ़ता है
  • चुनावी भाषणों में इसका दुरुपयोग लोकतंत्र को कमजोर करता है

फिर भी, अदालत ने बार-बार कहा है कि कार्रवाई प्रशासन की जिम्मेदारी है।


अदालत की टिप्पणी पर विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह टिप्पणी संतुलित है:

  • सुप्रीम कोर्ट खुद पूरा देश नहीं देख सकता
  • अगर वह हर केस में दखल देगा तो भीड़भाड़ बढ़ेगी
  • हाई कोर्ट और प्रशासन को सक्रिय होना होगा

कई विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि हेट स्पीच के मामलों में कानून का समान रूप से पालन होना जरूरी है।


राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया में बहस तेज हो गई।
कुछ लोग बोले:

  • “सुप्रीम कोर्ट ने जिम्मेदारी सही जगह डाली।”
  • “पुलिस और राज्य सरकारें ही हेट स्पीच रोक सकती हैं।”

वहीं, कई लोगों ने कहा कि:

  • “अदालत को फिर भी सख्त दिशा-निर्देश देने चाहिए।”
  • “प्रशासन कई बार कार्रवाई नहीं करता, इसलिए लोग सुप्रीम कोर्ट आते हैं।”

हेट स्पीच भारत में एक संवेदनशील और राजनीतिक रूप से विवादित मुद्दा है।


आगे का रास्ता—कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने साफ कहा कि:

  • यदि कोई विशेष घटना है तो शिकायत दर्ज कराएं
  • FIR न हो तो हाई कोर्ट जाएं
  • सुप्रीम कोर्ट अंतिम विकल्प है
  • देशव्यापी निगरानी करना संभव नहीं

इसका मतलब है कि आगे भी हेट स्पीच के मामलों में प्राथमिक जिम्मेदारी प्रशासन और राज्य संस्थाओं की ही होगी।

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