
देश में युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई स्किल इंडिया मिशन को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इस कार्रवाई के तहत 41 स्किल इंडिया ट्रेनिंग सेंटरों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जबकि 11 अन्य संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
यह मामला न केवल सरकारी फंड के दुरुपयोग का है, बल्कि इससे देश के लाखों युवाओं के भविष्य और कौशल विकास कार्यक्रमों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
🔹 क्या है पूरा मामला?

CAG की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, कई स्किल इंडिया ट्रेनिंग सेंटरों में:
- बुनियादी ढांचे की भारी कमी पाई गई
- प्रशिक्षकों की योग्यता मानकों के अनुरूप नहीं थी
- फर्जी नामांकन और उपस्थिति दर्ज की गई
- प्रशिक्षण के नाम पर मिले सरकारी फंड का सही उपयोग नहीं हुआ
इन गंभीर खामियों को देखते हुए सरकार ने तुरंत जांच के आदेश दिए, जिसके बाद यह सख्त कार्रवाई की गई।
🔹 41 केंद्रों पर FIR, 11 को नोटिस क्यों?
सरकारी सूत्रों के अनुसार:
- 41 ट्रेनिंग सेंटरों में वित्तीय अनियमितताएं और नियमों का खुला उल्लंघन पाया गया
- कुछ केंद्रों ने बिना प्रशिक्षण दिए ही फंड का दावा किया
- कई स्थानों पर भवन, मशीनरी और लैब जैसी मूलभूत सुविधाएं ही मौजूद नहीं थीं
वहीं, 11 अन्य संस्थाओं को इसलिए नोटिस जारी किया गया है क्योंकि उनके खिलाफ प्रारंभिक स्तर पर गड़बड़ियां पाई गई हैं और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
🔹 बुनियादी ढांचे और फंड के दुरुपयोग पर सवाल
CAG रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि:
- कई केंद्र कागजों पर तो चालू थे, लेकिन जमीनी स्तर पर बंद पाए गए
- प्रशिक्षुओं को आवश्यक उपकरण और प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई
- करोड़ों रुपये का फंड तय उद्देश्य के बजाय अन्य मदों में खर्च किया गया
यह स्थिति स्किल इंडिया जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के उद्देश्यों के बिल्कुल विपरीत मानी जा रही है।
🔹 सरकार का रुख: जीरो टॉलरेंस
सरकार ने स्पष्ट किया है कि:
- कौशल विकास योजनाओं में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी
- दोषी पाए जाने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द की जा सकती है
- भविष्य में फंड रिलीज से पहले सख्त निगरानी और थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य होगा
सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई युवाओं के हित में है, ताकि उन्हें वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सके।
🔹 युवाओं और समाज पर असर
स्किल इंडिया मिशन का सीधा संबंध देश के युवाओं के रोजगार से है। ऐसे में इन अनियमितताओं का प्रभाव:
- युवाओं को सही कौशल न मिल पाना
- रोजगार पाने में कठिनाई
- सरकारी योजनाओं पर भरोसे में कमी
जैसे गंभीर परिणामों के रूप में सामने आ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते की गई यह कार्रवाई भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने में मददगार साबित होगी।
🔹 विपक्ष और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही की मांग की है। उनका कहना है कि:
- यदि समय पर निगरानी होती, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती
- दोष केवल ट्रेनिंग सेंटरों का नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र का भी है
वहीं, नीति विशेषज्ञों का मानना है कि CAG रिपोर्ट के आधार पर की गई यह कार्रवाई प्रणाली सुधार (System Reforms) की दिशा में एक जरूरी कदम है।
🔹 आगे क्या होगा?
अब आगे की प्रक्रिया में:
- FIR दर्ज केंद्रों पर विस्तृत जांच होगी
- दोष सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई और फंड रिकवरी की जाएगी
- नोटिस प्राप्त संस्थाओं के जवाब के आधार पर आगे का फैसला होगा
साथ ही, सरकार स्किल इंडिया मिशन के तहत काम कर रहे अन्य केंद्रों की भी री-ऑडिट कराने पर विचार कर रही है।
✍️ समाधान
CAG की रिपोर्ट के बाद स्किल इंडिया ट्रेनिंग सेंटरों पर की गई यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत है कि सरकारी योजनाओं में लापरवाही और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 41 केंद्रों पर FIR और 11 को नोटिस न केवल एक दंडात्मक कदम है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक चेतावनी भी है।
यदि सुधारात्मक कदम सही तरीके से लागू किए गए, तो स्किल इंडिया मिशन अपने मूल उद्देश्य—युवाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना—को मजबूती से आगे बढ़ा सकेगा।




