

हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही बाजार पर बिकवाली का दबाव साफ नजर आया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 400 अंकों की गिरावट के साथ फिसल गया, जबकि निफ्टी 26,200 के अहम स्तर से नीचे आ गया। निवेशकों की धारणा कमजोर दिखी, जिसका असर बड़े और मझोले दोनों शेयरों पर पड़ा।
बाजार खुलते ही बिकवाली हावी


सुबह बाजार खुलते ही लाल निशान में कारोबार शुरू हुआ। आईटी, बैंकिंग, मेटल और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। खासतौर पर हैवीवेट शेयरों में बिकवाली ने बाजार को नीचे खींचा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब बड़े शेयर टूटते हैं, तो पूरे बाजार की दिशा नकारात्मक हो जाती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत बड़े शेयरों पर दबाव
देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। रिलायंस में आई गिरावट ने सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर अतिरिक्त दबाव डाला। इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर के प्रमुख शेयरों और चुनिंदा आईटी कंपनियों में भी मुनाफावसूली देखी गई।
विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक फिलहाल बड़े शेयरों में जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।
वैश्विक संकेतों का असर
भारतीय बाजार पर वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेतों का भी सीधा असर पड़ा। अमेरिका और एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में हालिया गिरावट ने घरेलू निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, महंगाई के आंकड़े और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक वैश्विक बाजारों पर दबाव बना रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है, तो उभरते बाजारों से निवेशक पैसा निकालने लगते हैं, जिसका असर भारत जैसे देशों पर साफ दिखता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Selling)

शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली मानी जा रही है। बीते कुछ सत्रों से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से एफआईआई भारतीय बाजार में सतर्क रुख अपना रहे हैं।
इस बिकवाली का सीधा असर बाजार की तरलता पर पड़ता है, जिससे सूचकांक दबाव में आ जाते हैं।
सेक्टोरल प्रदर्शन: कौन से सेक्टर गिरे
आज के कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में नजर आए:
- बैंकिंग सेक्टर: प्राइवेट और सरकारी बैंकों के शेयरों में कमजोरी
- आईटी सेक्टर: वैश्विक मंदी की आशंका से आईटी शेयरों में दबाव
- मेटल सेक्टर: अंतरराष्ट्रीय मांग में कमजोरी का असर
- एनर्जी सेक्टर: कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से दबाव
हालांकि, कुछ चुनिंदा एफएमसीजी और फार्मा शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली, जिससे गिरावट थोड़ी थमी।
निवेशकों की धारणा क्यों कमजोर?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशक “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपना रहे हैं। ऊंचे स्तरों पर बाजार पहले ही काफी तेजी दिखा चुका है, ऐसे में मुनाफावसूली स्वाभाविक मानी जा रही है। इसके अलावा:
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली
- ब्याज दरों को लेकर चिंता
- आगामी आर्थिक आंकड़ों का इंतजार
इन सभी कारणों ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है।
तकनीकी स्तरों पर नजर
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 26,200 का स्तर बेहद अहम था। इसके नीचे फिसलने से बाजार में और कमजोरी आ सकती है। अगर निफ्टी 26,000 के स्तर को भी नहीं संभाल पाया, तो अगले कुछ सत्रों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं, सेंसेक्स के लिए 86,000 के आसपास मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।
आगे बाजार का रुख क्या होगा?
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों, एफआईआई के रुख और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती है और वैश्विक बाजारों में स्थिरता आती है, तो भारतीय बाजार में भी सुधार देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि निवेशक घबराकर फैसले न लें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही फोकस रखें।
भारतीय शेयर बाजार में आज की गिरावट कई कारकों का नतीजा है, जिसमें वैश्विक कमजोर संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बड़े शेयरों में दबाव शामिल है। सेंसेक्स का 400 अंक टूटना और निफ्टी का 26,200 के नीचे फिसलना निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अच्छे शेयरों में खरीदारी का अवसर भी बन सकती है।








