🏛️ संसद का बजट सत्र: लोकसभा 9 फरवरी तक स्थगित, विपक्ष के हंगामे से बाधित कार्यवाही


संसद के बजट सत्र का आठवां दिन देश की संसदीय राजनीति में एक बार फिर टकराव और तीखे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का गवाह बना। विपक्ष के कड़े विरोध, नारेबाजी और वेल में आकर प्रदर्शन के कारण लोकसभा की कार्यवाही 9 फरवरी सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव ने संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलने नहीं दिया।
लोकसभा में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों के सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष का आरोप था कि सरकार बजट से जुड़े अहम सवालों पर चर्चा से बच रही है और संवैधानिक संस्थाओं की अनदेखी की जा रही है। हंगामा इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और अंततः लोकसभा अध्यक्ष को सदन स्थगित करने का फैसला लेना पड़ा।
🔴 विपक्ष का विरोध क्यों?
विपक्षी दलों का कहना है कि बजट सत्र का उद्देश्य देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर सार्थक चर्चा करना होता है। लेकिन उनका आरोप है कि सरकार संसद में जवाबदेही से बच रही है। कुछ विपक्षी सांसदों ने यह भी कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की मांग को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे संसदीय लोकतंत्र कमजोर होता है।
🟠 सरकार का पक्ष
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। उनका कहना था कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन हंगामे के कारण संसद का समय बर्बाद हो रहा है। सरकार ने विपक्ष से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करें और सदन को चलने दें।
🟢 राज्यसभा में प्रधानमंत्री का संबोधन
जहां एक ओर लोकसभा में हंगामा जारी रहा, वहीं राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने सरकार की नीतियों, बजट की प्राथमिकताओं और देश की आर्थिक दिशा पर विस्तार से बात की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने बजट को विकासोन्मुख बताते हुए कहा कि इसमें गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के हितों को प्राथमिकता दी गई है। पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि “लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन बार-बार सदन बाधित करना समाधान नहीं है।”
📊 बजट सत्र का महत्व
बजट सत्र संसद का सबसे महत्वपूर्ण सत्र माना जाता है क्योंकि इसी दौरान देश का आम बजट पेश किया जाता है और उस पर चर्चा होती है। बजट से देश की आर्थिक नीतियों, कर प्रणाली, विकास योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों की दिशा तय होती है। ऐसे में बार-बार कार्यवाही का स्थगित होना न केवल संसदीय समय की बर्बादी है, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा में भी बाधा है।
⚖️ लोकतंत्र और संसदीय मर्यादा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में हंगामा अब एक सामान्य बात बनती जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। संसद वह मंच है जहां सरकार और विपक्ष के बीच संवाद होना चाहिए। यदि संवाद की जगह टकराव ले ले, तो इसका सीधा असर नीतिगत फैसलों और जनता के विश्वास पर पड़ता है।
🔍 आगे क्या?
अब लोकसभा की कार्यवाही 9 फरवरी को फिर से शुरू होगी। उम्मीद की जा रही है कि इस बीच सरकार और विपक्ष के बीच कुछ सहमति बने, ताकि बजट पर सार्थक चर्चा हो सके। देश की जनता भी यही चाहती है कि उनके प्रतिनिधि संसद में बैठकर उनके मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करें, न कि केवल राजनीतिक प्रदर्शन करें।
✍️ समाधान
संसद का बजट सत्र देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक अहम स्तंभ है। लोकसभा का बार-बार स्थगित होना यह दर्शाता है कि राजनीतिक मतभेद कितने गहरे हो चुके हैं। वहीं, राज्यसभा में प्रधानमंत्री का जवाब सरकार का पक्ष मजबूती से रखने की कोशिश माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चल पाती है या राजनीतिक हंगामे का दौर जारी रहेगा।








