राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का ऐतिहासिक उत्तराखंड दौरा — विधानसभा को करेंगी संबोधित, बनीं नैनीताल जाने वाली पहली महिला राष्ट्रपति

Spread the love

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का उत्तराखंड दौरा — ऐतिहासिक दिन

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज उत्तराखंड के आधिकारिक दौरे पर हैं। अपने इस दौरे के दौरान वे उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करेंगी, जो राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

यह संबोधन न केवल राज्य की नीतिगत दिशा पर प्रकाश डालेगा, बल्कि यह महिला नेतृत्व की नई ऊँचाइयों का भी प्रतीक है। राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने कार्यकाल में लगातार राज्यों के विकास, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर जोर दिया है।


विधानसभा का विशेष सत्र — राज्य के लिए मील का पत्थर

देहरादून में आयोजित यह विशेष सत्र राज्य की स्थापना दिवस (9 नवंबर) के अवसर के निकट आयोजित किया जा रहा है। इस सत्र में राष्ट्रपति का संबोधन राज्य के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है, क्योंकि वे विकास, शिक्षा, पर्यावरण और महिला सहभागिता जैसे मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगी।

राष्ट्रपति के आगमन से पहले विधानसभा और राजभवन परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, और सभी विधायकों को इस विशेष सत्र में उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।


नैनीताल में ऐतिहासिक क्षण — पहली महिला राष्ट्रपति का आगमन

अपने इस दौरे के तहत राष्ट्रपति मुर्मु नैनीताल भी जाएँगी। यह अवसर ऐतिहासिक है, क्योंकि वे भारत की पहली महिला राष्ट्रपति हैं जो इस खूबसूरत हिल स्टेशन का आधिकारिक दौरा कर रही हैं।

नैनीताल में राष्ट्रपति ने राजभवन का दौरा किया, झील क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को लेकर स्थानीय अधिकारियों से चर्चा की और पहाड़ी इलाकों में सतत विकास के मॉडल पर विचार-विमर्श किया।

स्थानीय लोगों ने राष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया — फूलों की माला, लोकनृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ।


राष्ट्रपति का संदेश — “प्रकृति, प्रगति और पहाड़ एक साथ चलें”

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में विकास की अवधारणा को प्रकृति और संस्कृति के संतुलन के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने पहाड़ी महिलाओं की भूमिका की सराहना की, जो जल, जंगल और जमीन की रक्षा में हमेशा अग्रणी रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के विकास का रास्ता तभी मजबूत होगा, जब उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य आत्मनिर्भरता, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी बनेंगे।


स्थानीय लोगों में उत्साह

राष्ट्रपति के इस दौरे से न केवल देहरादून बल्कि नैनीताल और आसपास के इलाकों में भी भारी उत्साह देखने को मिला।

  • स्थानीय स्कूलों के बच्चों ने राष्ट्रपति के स्वागत में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
  • पर्यावरण से जुड़े स्वयंसेवी संगठनों ने अपने प्रयासों की जानकारी दी।
  • राष्ट्रपति ने कुछ स्थानीय महिला उद्यमियों से भी मुलाकात की, जिन्होंने पहाड़ी उत्पादों के जरिए स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

दौरे का महत्व

राष्ट्रपति मुर्मु का यह दौरा कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है:

  1. राज्य के विकास एजेंडा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर।
  2. महिला नेतृत्व की मिसाल — राष्ट्रपति मुर्मु देश की आदिवासी समुदाय से आने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं, और उनका यह दौरा सामाजिक समावेश का प्रतीक है।
  3. प्राकृतिक और सांस्कृतिक संरक्षण पर बल — उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास की योजनाओं में पर्यावरण का संतुलन आवश्यक है।

निष्कर्ष

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का उत्तराखंड दौरा एक ऐतिहासिक क्षण है — न केवल इसलिए कि उन्होंने विधानसभा को संबोधित किया, बल्कि इसलिए भी कि उन्होंने पहाड़ी राज्य की आत्मा को समझते हुए उसके भविष्य की दिशा पर बात की।

उनका यह संदेश कि “प्रकृति के साथ प्रगति ही सच्चा विकास है” आने वाले वर्षों के लिए नीतिगत मार्गदर्शन के रूप में देखा जाएगा।

भारत की पहली महिला राष्ट्रपति के इस दौरे ने उत्तराखंड के लोगों के दिलों में गर्व, प्रेरणा और उम्मीद की नई ज्योति जलाई है।


 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »