🏛️ संसद के बजट सत्र में फिर गरमाया सियासी माहौल

संसद के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा आज भी जारी रही, लेकिन कार्यवाही शांतिपूर्ण नहीं रह सकी। विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चीन सीमा विवाद और पूर्व थलसेना प्रमुख की एक अनरिलीज्ड किताब का जिक्र किए जाने के बाद लोकसभा में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। सत्ता पक्ष ने इन बयानों को देश की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रहे, जिन्होंने राहुल गांधी के आरोपों का सदन में खड़े होकर जोरदार खंडन किया और विपक्ष पर सेना के मनोबल को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
📌 राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
हर बजट सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होती है, जिसमें सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाती है और विपक्ष नीतियों की आलोचना करता है। इसी चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने सरकार की विदेश और रक्षा नीति पर सवाल उठाए, खासकर भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर।
उनका कहना था कि सरकार देश को वास्तविक हालात नहीं बता रही और सीमा पर स्थिति उतनी सामान्य नहीं है, जितना आधिकारिक बयानों में दिखाया जा रहा है।
🇨🇳 चीन सीमा विवाद पर राहुल गांधी के बयान
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि चीन के साथ सीमा पर स्थिति गंभीर है और सरकार इस मुद्दे पर संसद और देश को गुमराह कर रही है। उन्होंने दावा किया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत की स्थिति कमजोर हुई है।
इसके साथ ही उन्होंने पूर्व थलसेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की एक अनरिलीज्ड किताब के कथित अंशों का हवाला दिया, जिससे सरकार की रणनीति पर सवाल खड़े किए गए। यही बिंदु सत्ता पक्ष को सबसे ज्यादा आपत्तिजनक लगा।
🔥 अनरिलीज्ड बुक के जिक्र पर बढ़ा विवाद
सत्ता पक्ष के सांसदों का कहना था कि एक ऐसी किताब का संदर्भ देना, जो अभी प्रकाशित भी नहीं हुई है, न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों को सार्वजनिक मंच पर लाने जैसा है।
जैसे ही राहुल गांधी ने इस किताब का जिक्र किया, ट्रेजरी बेंच से विरोध शुरू हो गया। नारेबाजी, मेज थपथपाने और लगातार टोका-टाकी के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
🛡️ राजनाथ सिंह का पलटवार
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हंगामे के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार और सशस्त्र बल देश की सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को “भ्रामक और तथ्यहीन” बताया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की सेना ने हमेशा की तरह सीमा पर मजबूती से मोर्चा संभाला हुआ है और किसी भी प्रकार का क्षेत्रीय नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अनरिलीज्ड किताब के कथित अंशों के आधार पर सरकार पर आरोप लगाना गलत परंपरा है।
⚖️ विपक्ष बनाम सत्ता पक्ष: आरोप-प्रत्यारोप
इस बहस के दौरान विपक्ष ने सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीति करने का आरोप मढ़ा।
सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना था कि इस तरह के बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति को कमजोर करते हैं। वहीं विपक्ष का तर्क था कि संसद में सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है और सरकार को जवाबदेह होना चाहिए।
⏸️ कार्यवाही बाधित, अध्यक्ष की सख्ती
लगातार हंगामे के कारण लोकसभा अध्यक्ष को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। सदस्यों से संयम बरतने की अपील की गई, लेकिन शोर-शराबा थमने का नाम नहीं ले रहा था। अंततः कुछ समय के लिए कार्यवाही स्थगित भी करनी पड़ी।
🗳️ राजनीतिक मायने और संदेश
इस पूरे घटनाक्रम के राजनीतिक मायने भी गहरे हैं। एक ओर विपक्ष आगामी चुनावी माहौल में सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष राष्ट्रवाद और सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्ष को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे आने वाले दिनों में भी संसद और राजनीति के केंद्र में बने रहेंगे।
🧭 निष्कर्ष
संसद का यह दृश्य एक बार फिर दिखाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी राजनीतिक टकराव कितना तीखा हो सकता है। राहुल गांधी और राजनाथ सिंह के बीच हुई इस बहस ने बजट सत्र की कार्यवाही को गर्मा दिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे पर और क्या स्पष्टीकरण देती है और विपक्ष अपनी रणनीति को किस दिशा में ले जाता है। फिलहाल, संसद में शोर है, सियासत तेज है और देश की निगाहें सदन पर टिकी हुई हैं।








