नेशनल हेराल्ड मामले में नई FIR: सोनिया-राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं Sonia Gandhi और Rahul Gandhi के लिए आज फिर मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 30 नवंबर 2025 को उनके खिलाफ एक नई FIR (First Information Report) दर्ज की है। यह FIR उस शिकायत के आधार पर दर्ज की गई, जो हाल ही में Enforcement Directorate (ED) ने पुलिस को भेजी थी।
इस कार्रवाई के साथ ही, लंबे समय से चले रहे नेशनल हेराल्ड विवाद में दोबारा तीव्रता आ गई है। कांग्रेस इसे “प्रतिशोध की राजनीति” मान रही है, जबकि विपक्षी दल और सरकार इसे भ्रष्टाचार व वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ जरूरी कदम कह रहे हैं।
📌 FIR में क्या है आरोप — प्रमुख बातें
- FIR 3 अक्टूबर 2025 को ED की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी।
- इसमें सिर्फ सोनिया-राहुल नहीं, बल्कि छह अन्य व्यक्ति और तीन कंपनियाँ भी आरोपी बनाए गए हैं। इनमें शामिल हैं: Associated Journals Ltd (AJL), Young Indian Pvt Ltd और Dotex Merchandise Pvt Ltd।
- आरोप है कि 2010 में AJL की संपत्ति, जिसकी अनुमानित कीमत ₹2,000 करोड़ बताई जाती रही है, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत Young Indian के हवाले कर दी गई। FIR में यह कहा गया है कि Dotex से Young Indian को ₹1 करोड़ मिले, और फिर Young Indian ने मात्र ₹50 लाख देकर कांग्रेस को AJL पर नियंत्रण सौंपा।
- पुलिस ने IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र), 403 (चोरी या दुरुपयोग), 406 (विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप लगाए हैं।
- साथ ही, इस मामले को मनी-लौन्ड्रिंग से जोड़ते हुए ED की शिकायत के तहत जांच की पहल की गई है।
📚 केस का इतिहास संक्षिप्त में — नेशनल हेराल्ड विवाद क्या है?
- नेशनल हेराल्ड अखबार 1938 में शुरू हुआ था, जिसे आजादी के समय में स्वतंत्र भारत की आवाज़ कहा जाता रहा। इसके प्रकाशन के पीछे पार्टी से जुड़ी संस्था था AJL।
- 2008 के आसपास अखबार बंद हो गया, और कहते हैं कि AJL ने वाणिज्यिक उपयोग की दिशा में कदम बढ़ाया। कांग्रेस पर आरोप था कि पार्टी ने AJL के जरिए कई लाभ उठाए।
- 2012 में एक शिकायतकर्ता द्वारा आरोप लगाए गए थे कि AJL की जमीन व संपत्ति – जो पहले लोगों की भलाई के लिए दी गई थी — का गलत इस्तेमाल हुआ। इसके बाद कई एजेंसियों ने जांच शुरू की थी।
- 2024 में ED ने पहली बार इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। लेकिन अदालत में अभी तक पूर्ण सुनवाई नहीं हुई थी।
- अब, 2025 में नई FIR दर्ज होने से मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।
⚖️ राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रिया
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस ने इस FIR को “राजनीति से प्रेरित” और “प्रतिशोध की राजनीति” बताते हुए खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक निशाना साधने की कोशिश है।
केंद्र और सरकार का रुख
केंद्रीय मंत्रियों का कहना है कि यह कोई राजनीति नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि यह FIR ED की शिकायत पर आधारित है, और अगर आरोप सही पाए गए, तो सभी की जवाबदेही तय होगी।
कानूनी प्रक्रिया
ED ने अपनी शिकायत को PMLA की धारा 66(2) का हवाला देकर दिल्ली पुलिस को भेजा था, जिसके बाद EOW ने संबंधित पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की। अब मामले में आरोपियों से पूछताछ की जा सकती है, और कोर्ट में सुनवाई हो सकती है।
🌐 इस FIR का मतलब — देश और राजनीति पर असर
- इस FIR से कांग्रेस नेतृत्व पर एक बड़ा दाग लग सकता है। यदि आरोप साबित हुए, तो पार्टी की नैतिक व राजनीतिक छवि प्रभावित होगी।
- राजनीतिक मोर्चे पर, यह बीजेपी समेत उन दलों के लिए हथियार बन सकता है, जो इसे कांग्रेस विरुद्ध प्रचार में इस्तेमाल करना चाहेंगे।
- कानूनी तौर पर, अगर अदालत में मामला आगे बढ़ता है, तो यह पूर्ववर्ती फैसलों और संपत्ति विवादों को फिर से उजागर करेगा।
- आम जनता के नजरिए से, यह सवाल उठता है कि राजनीतिक दल और मीडिया मालिकों की वित्तीय पारदर्शिता कितनी है।
📆 आगे क्या हो सकता है — संभावित घटनाक्रम
- दिल्ली पुलिस EOW द्वारा आरोपियों की पूछताछ: सोनिया-राहुल, अन्य नेताओं और कंपनियों के अधिकारियों की पूछताछ।
- अदालत में FIR की पुष्टि, केस का ट्रायल शुरू होना।
- मीडिया रिपोर्टिंग में वृद्धि — संपत्ति, निवेश, वित्तीय लेन-देन की पूरी जांच।
- राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ — विरोध प्रदर्शन, बयानबाज़ी व जन-आंदोलन।
- यदि आरोप साबित हुए, तो संपत्ति कुर्की, जुर्माना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई।
✅ निष्कर्ष
नेशनल हेराल्ड मामले में नई FIR दर्ज होना साबित करता है कि यह विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है — बल्कि अब यह और गहराता जा रहा है। आरोपों की गंभीरता, राजनीतिक असर, और कानूनी प्रक्रिया मिलकर इसे 2025-26 के सबसे बड़े राजनीतिक-न्यायिक मामलों में से एक बना सकते हैं।
यह FIR सिर्फ एक कानूनी घटना नहीं, बल्कि भारत में लोकतंत्र, मीडिया, राजनीति और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े सवालों का प्रतीक है।








