Artemis II: 54 साल बाद फिर इतिहास की ओर! नासा के आर्टेमिस-2 ने पार की पृथ्वी की कक्षा
1 अप्रैल, 2026 को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से रवाना हुआ नासा का Artemis II मिशन अब अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। मिशन कंट्रोल के अनुसार, ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान ने सफलतापूर्वक Trans-lunar Injection (TLI) बर्न पूरा कर लिया है, जिसका सीधा मतलब है कि अब यह यान पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को पीछे छोड़ते हुए सीधे चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है।
क्यों खास है यह मिशन?
यह मिशन सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि मानवता के नए युग की शुरुआत है। 1972 के Apollo 17 मिशन के बाद यह पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब जा रहा है।
“यह एक अद्भुत यात्रा है। हमने अंतरिक्ष से अब तक दो बार चंद्रमा का उदय (Moonrise) देख लिया है।” — रीड वाइसमैन (कमांडिंग ऑफिसर, Artemis II)
मिशन की मुख्य बातें:
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4 जांबाज अंतरिक्ष यात्री: इस मिशन में कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल हैं।
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इतिहास रचती टीम: क्रिस्टीना कोच चंद्रमा की ओर जाने वाली पहली महिला और विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत व्यक्ति बन गए हैं।
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चंद्रमा की दूरी: ओरियन कैप्सूल चंद्रमा की सतह से लगभग 7,400 किलोमीटर (4,600 मील) ऊपर से गुजरेगा।
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10 दिनों का सफर: यह पूरा मिशन लगभग 10 दिनों का है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा का चक्कर लगाकर सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में उतरेंगे।
आगे क्या होगा?
पृथ्वी की कक्षा को सफलतापूर्वक पार करने के बाद अब अंतरिक्ष यात्री अगले 4 दिनों तक गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) के सफर पर रहेंगे। इस दौरान वे ओरियन यान के लाइफ सपोर्ट सिस्टम, मैनुअल पायलटिंग और संचार प्रणालियों का कड़ा परीक्षण करेंगे। यह डेटा भविष्य के Artemis III मिशन के लिए नींव रखेगा, जिसका लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर इंसानों को फिर से उतारना है।





