🛰️ नासा का आर्टेमिस-II मिशन: 50 साल बाद चंद्रमा की ओर इंसान की ऐतिहासिक वापसी
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA एक बार फिर मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में नया अध्याय लिखने जा रही है। Artemis II मिशन के ज़रिए नासा लगभग 50 वर्षों बाद इंसानों को चंद्रमा के बेहद करीब भेजने की तैयारी में है। फरवरी 2026 की शुरुआत में प्रस्तावित यह मिशन, न केवल तकनीकी दृष्टि से बल्कि भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है।
1972 में अपोलो-17 मिशन के बाद यह पहला मौका होगा जब इंसान चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचेगा। यह मिशन चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है।
🚀 आर्टेमिस-II मिशन क्या है?

आर्टेमिस-II, नासा के Artemis Program का दूसरा प्रमुख मानव मिशन है। यह पूरी तरह से क्रू (Crewed Mission) होगा, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री सवार होंगे। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरना (Lunar Flyby) है, न कि चंद्र सतह पर उतरना।
👉 यह मिशन यह जांचने के लिए है कि क्या मानव, लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्रा के दौरान सुरक्षित रह सकते हैं और क्या सभी प्रणालियाँ भविष्य के लैंडिंग मिशन के लिए तैयार हैं।
👨🚀 मिशन में शामिल चार अंतरिक्ष यात्री

इस मिशन में चार अनुभवी अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे, जिनमें पुरुष और महिला दोनों होंगे। यह पहली बार होगा जब कोई महिला अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के इतने करीब जाएगी।
इनकी भूमिका होगी:
- अंतरिक्ष यान की मैन्युअल और ऑटोमैटिक उड़ान की जांच
- जीवन-समर्थन प्रणाली (Life Support Systems) का परीक्षण
- गहरे अंतरिक्ष में संचार और नेविगेशन सिस्टम की पुष्टि
- आपातकालीन स्थितियों में क्रू की प्रतिक्रिया का मूल्यांकन
🛰️ ओरियन स्पेसक्राफ्ट और SLS रॉकेट


आर्टेमिस-II मिशन में नासा का अत्याधुनिक Orion Spacecraft इस्तेमाल किया जाएगा। इसे धरती की कक्षा से बाहर भेजने के लिए दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट Space Launch System (SLS) प्रयोग में लाया जाएगा।
🔧 तकनीकी खूबियाँ
- Orion में अत्याधुनिक हीट शील्ड
- लंबी अवधि के लिए ऑक्सीजन और पानी की व्यवस्था
- हाई-स्पीड रिएंट्री (Earth Re-entry) क्षमता
- डीप स्पेस कम्युनिकेशन सिस्टम
🌕 चंद्रमा की कक्षा तक यात्रा क्यों ज़रूरी?
चंद्रमा की कक्षा तक जाना भविष्य में चंद्रमा पर उतरने और वहां स्थायी बेस बनाने की दिशा में एक अहम अभ्यास है।
इसके प्रमुख कारण:
- अंतरिक्ष यात्रियों पर पड़ने वाले रेडिएशन का अध्ययन
- लंबी दूरी की मानव उड़ान का अनुभव
- चंद्र कक्षा में नेविगेशन की सटीकता
- भविष्य के चंद्र लैंडिंग मिशन की तैयारी
🔭 अपोलो मिशन से कितना अलग है आर्टेमिस-II?
| अपोलो मिशन (1969–1972) | आर्टेमिस-II मिशन |
|---|---|
| सीमित तकनीक | आधुनिक AI और ऑटोमेशन |
| केवल पुरुष क्रू | विविध क्रू (महिला सहित) |
| अल्पकालिक लक्ष्य | दीर्घकालिक चंद्र उपस्थिति |
| केवल चंद्र लैंडिंग | चंद्र + मंगल की तैयारी |
🌌 भविष्य की राह: आर्टेमिस-III और उससे आगे
आर्टेमिस-II के सफल होने के बाद नासा Artemis-III मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्र सतह पर उतारने की योजना बना रहा है। यही नहीं, आर्टेमिस कार्यक्रम को मंगल ग्रह (Mars Mission) की तैयारी की नींव भी माना जा रहा है।
👉 लक्ष्य है:
- चंद्रमा पर स्थायी मानव बेस
- अंतरिक्ष संसाधनों का उपयोग
- मंगल ग्रह पर मानव मिशन की तैयारी
🌍 भारत और दुनिया के लिए क्या मायने?
आर्टेमिस मिशन केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। इसमें कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ और साझेदार देश शामिल हैं। भारत के लिए यह मिशन वैज्ञानिक सहयोग, तकनीकी सीख और भविष्य में साझा अंतरिक्ष अभियानों के नए द्वार खोल सकता है।
🧠 निष्कर्ष
आर्टेमिस-II मिशन मानव सभ्यता के अंतरिक्ष सफर में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। यह मिशन न केवल चंद्रमा तक इंसान की वापसी का प्रतीक है, बल्कि आने वाले दशकों में अंतरिक्ष में मानव विस्तार की मजबूत नींव भी रखता है।
फरवरी 2026 में होने वाला यह मिशन पूरी दुनिया की निगाहों का केंद्र होगा।




