📰 मोहन भागवत का बड़ा बयान: “RSS कोई पैरामिलिट्री संगठन नहीं, यह अनुशासन और चरित्र निर्माण का मंच है”


RSS को लेकर उठते सवालों पर स्पष्ट जवाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर समय-समय पर यह बहस होती रही है कि क्या संघ एक राजनीतिक या अर्धसैनिक (पैरामिलिट्री) संगठन है। इन्हीं चर्चाओं के बीच मोहन भागवत, प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक कार्यक्रम में बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है।
उन्होंने कहा कि RSS को पैरामिलिट्री संगठन समझना पूरी तरह गलत है और इसके उद्देश्य को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है।
“यूनिफॉर्म और पथ संचलन का मतलब सैन्य संगठन नहीं”
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि संघ के स्वयंसेवक भले ही यूनिफॉर्म पहनते हों और पथ संचलन करते हों, लेकिन इसका मकसद सैन्य प्रशिक्षण या किसी प्रकार की लड़ाकू गतिविधि नहीं है।
उनके शब्दों में,
“हम यूनिफॉर्म पहनते हैं और पथ संचलन करते हैं, लेकिन हमारा उद्देश्य अनुशासन, समाज सेवा और चरित्र निर्माण है, न कि सैन्य कार्रवाई।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का प्रशिक्षण व्यक्ति के नैतिक और सामाजिक विकास पर केंद्रित है।
RSS का मूल उद्देश्य: चरित्र निर्माण और सामाजिक अनुशासन

संघ प्रमुख ने कहा कि RSS की स्थापना समाज को संगठित करने, स्वयंसेवकों में अनुशासन, सेवा भाव और राष्ट्रभक्ति विकसित करने के लिए की गई थी।
संघ के कार्यक्रमों में शारीरिक अभ्यास, बौद्धिक चर्चा और सामाजिक गतिविधियां शामिल होती हैं, जिनका उद्देश्य नागरिकों को जिम्मेदार और संस्कारित बनाना है।
उन्होंने कहा कि संघ कभी भी हथियारबंद संगठन नहीं रहा और न ही उसका उद्देश्य सत्ता या सैन्य शक्ति हासिल करना है।
“RSS को केवल भाजपा के चश्मे से न देखें”
अपने बयान में मोहन भागवत ने एक और अहम बात कही। उन्होंने कहा कि RSS को केवल भारतीय जनता पार्टी के संदर्भ में देखना गलत है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है, जबकि भाजपा एक राजनीतिक दल है।
भागवत ने कहा,
“संघ समाज के लिए काम करता है। किसी राजनीतिक दल से संघ को जोड़कर देखना उसके व्यापक सामाजिक योगदान को सीमित करना है।”
RSS और राजनीति: बार-बार उठता रहा है सवाल
RSS और भाजपा के संबंधों को लेकर राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से बहस होती रही है। विपक्षी दल अक्सर संघ पर राजनीतिक प्रभाव डालने का आरोप लगाते हैं।
हालांकि संघ की ओर से बार-बार यह कहा जाता रहा है कि वह किसी भी राजनीतिक दल का अंग नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग के साथ काम करता है।
आलोचनाओं पर संघ प्रमुख का रुख
मोहन भागवत ने अप्रत्यक्ष रूप से संघ पर होने वाली आलोचनाओं का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि संघ को बिना समझे लेबल लगाना आसान है, लेकिन उसके कार्यों और विचारधारा को समझना जरूरी है।
संघ देशभर में शिक्षा, सेवा, आपदा राहत और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में काम करता रहा है।
पथ संचलन: अनुशासन का प्रतीक
RSS का पथ संचलन अक्सर चर्चा में रहता है। संघ प्रमुख ने कहा कि यह गतिविधि स्वयंसेवकों में समय पालन, एकता और अनुशासन विकसित करने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि कई संस्थाएं अपने सदस्यों के लिए यूनिफॉर्म और परेड जैसी गतिविधियां अपनाती हैं, लेकिन इससे वे सैन्य संगठन नहीं बन जातीं।
बयान का राजनीतिक और सामाजिक असर
मोहन भागवत के इस बयान को मौजूदा राजनीतिक माहौल में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान संघ की छवि को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करने और संगठन की वैचारिक स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश है।
समर्थकों की प्रतिक्रिया
संघ से जुड़े लोगों और समर्थकों ने इस बयान का स्वागत किया है। उनका कहना है कि RSS को लेकर अक्सर भ्रम फैलाया जाता है और संघ प्रमुख का यह बयान वास्तविकता को सामने लाता है।
विपक्ष की नजर
वहीं विपक्षी दलों की नजर भी इस बयान पर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में RSS और राजनीति के रिश्ते पर बहस और तेज हो सकती है।
मोहन भागवत का यह बयान RSS की भूमिका और उद्देश्य को स्पष्ट करने वाला माना जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि संघ न तो पैरामिलिट्री संगठन है और न ही किसी एक राजनीतिक दल का विस्तार।
संघ का मुख्य लक्ष्य समाज में अनुशासन, चरित्र निर्माण और सेवा भावना को बढ़ावा देना है। यह बयान RSS को लेकर चल रही बहसों में एक अहम संदर्भ बिंदु बन सकता है।








