ईरान में उबाल: भारी विरोध प्रदर्शन, इंटरनेट बंद और अमेरिका-ईरान तनाव में तेज़ी
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ईरान एक बार फिर सुर्खियों में है। देश के कई हिस्सों, खासकर राजधानी तेहरान, में सरकार के खिलाफ भीषण विरोध प्रदर्शन भड़क उठे हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि प्रशासन ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दीं। इन प्रदर्शनों की चिंगारी उस अपील से जुड़ी मानी जा रही है, जो निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने ईरान के लोगों से की थी। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयानों ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
🔥 कैसे शुरू हुए विरोध प्रदर्शन

ईरान में असंतोष कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन इस बार विरोध की तीव्रता कहीं ज्यादा देखी जा रही है।
- महंगाई
- बेरोज़गारी
- महिलाओं के अधिकार
- अभिव्यक्ति की आज़ादी
इन सभी मुद्दों पर जनता का गुस्सा लंबे समय से उबल रहा था। रजा पहलवी की हालिया अपील के बाद यह असंतोष सड़कों पर खुलकर सामने आ गया।
प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों में सरकारी इमारतों के बाहर नारेबाजी की और सत्ता परिवर्तन की मांग उठाई।
👑 रजा पहलवी की भूमिका
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निर्वासित युवराज रजा पहलवी, जो ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र हैं, लंबे समय से मौजूदा शासन के मुखर आलोचक रहे हैं।
- उन्होंने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों के ज़रिये ईरान की जनता से लोकतांत्रिक बदलाव की अपील की।
- उनकी अपील को खासतौर पर युवाओं का समर्थन मिला।
सरकारी हलकों का आरोप है कि विदेशी ताकतें रजा पहलवी के ज़रिये ईरान में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रही हैं।
📵 इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद

प्रदर्शन तेज़ होते ही ईरानी सरकार ने डिजिटल ब्लैकआउट का सहारा लिया।
- तेहरान सहित कई बड़े शहरों में इंटरनेट सेवाएं ठप
- मोबाइल नेटवर्क बाधित
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच सीमित
सरकार का दावा है कि यह कदम “अफवाहों और हिंसा को रोकने” के लिए उठाया गया है।
हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह आवाज़ दबाने की कोशिश है।
🏙️ ज़मीनी हालात: तेहरान से तबरीज़ तक

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार—
- कई जगहों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों में झड़पें हुईं
- दर्जनों लोगों की गिरफ्तारी
- कुछ क्षेत्रों में कर्फ्यू जैसे हालात
तेहरान, इस्फहान, मशहद और तबरीज़ जैसे शहरों में स्थिति सबसे ज्यादा तनावपूर्ण बताई जा रही है।
🇺🇸 डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर आक्रामक बयान दिए हैं।
- उन्होंने ईरानी सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया
- प्रदर्शनकारियों के समर्थन की बात कही
- ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि “दुनिया सब देख रही है”
ट्रंप के इस रुख से अमेरिका-ईरान संबंधों में नया तनाव पैदा हो गया है।
🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ईरान में हालात पर वैश्विक समुदाय की नजरें टिकी हैं।
- यूरोपीय देशों ने संयम बरतने की अपील की
- संयुक्त राष्ट्र ने मानवाधिकारों की रक्षा पर जोर दिया
- कई देशों ने इंटरनेट बंद करने पर चिंता जताई
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो इसका असर मध्य-पूर्व की स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
⚖️ सरकार बनाम जनता
ईरानी सरकार का कहना है कि—
- प्रदर्शन “विदेशी साजिश” का नतीजा हैं
- सुरक्षा बनाए रखने के लिए सख्ती ज़रूरी है
वहीं, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि—
- सरकार जनता की आवाज़ नहीं सुन रही
- असहमति को कुचला जा रहा है
- आर्थिक हालात बद से बदतर हो चुके हैं
यह टकराव अब केवल सियासी नहीं, बल्कि सिस्टम बनाम जनता की लड़ाई बनता जा रहा है।
🔮 आगे क्या?
विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिन ईरान के लिए बेहद अहम हैं।
- अगर दमन बढ़ा, तो विरोध और भड़क सकता है
- बातचीत का रास्ता खुला, तो हालात संभल सकते हैं
- अंतरराष्ट्रीय दबाव निर्णायक भूमिका निभा सकता है
फिलहाल, इंटरनेट बंदी और सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच ईरान एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है।








