मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक खबर सामने आई है। दूषित पेयजल के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग अब भी बीमार बताए जा रहे हैं। यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि आम नागरिकों की बुनियादी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में इस पूरे प्रकरण पर अहम सुनवाई होनी है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, इंदौर के कुछ इलाकों में पिछले कई दिनों से सप्लाई किए जा रहे पानी की गुणवत्ता खराब बताई जा रही थी। स्थानीय लोगों ने पानी से बदबू, गंदापन और रंग बदलने की शिकायतें की थीं। इसके बावजूद समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए।
दूषित पानी पीने के बाद लोगों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार जैसी समस्याएं होने लगीं। कई मरीजों की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 15 लोगों की मौत हो गई।
प्रभावित इलाके और हालात
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, शहर के कुछ विशेष वार्डों और बस्तियों में यह समस्या अधिक गंभीर रही। इन इलाकों में रहने वाले लोग पूरी तरह से नगर निगम की जलापूर्ति पर निर्भर हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि
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लंबे समय से पाइपलाइन लीकेज की शिकायतें की जा रही थीं
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नालियों और पेयजल पाइपलाइन की दूरी बेहद कम है
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पानी की नियमित जांच नहीं की जा रही थी
अस्पतालों में हालात और मेडिकल रिपोर्ट

सरकारी और निजी अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ गई। डॉक्टरों के अनुसार, अधिकतर मरीज जलजनित बीमारियों (Water Borne Diseases) से पीड़ित पाए गए।
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि पानी में बैक्टीरियल संक्रमण और गंदे स्रोतों का मिश्रण हो सकता है। हालांकि, विस्तृत लैब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
घटना सामने आने के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम हरकत में आया। अब तक उठाए गए प्रमुख कदमों में शामिल हैं:
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प्रभावित इलाकों में जलापूर्ति अस्थायी रूप से बंद
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पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए
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टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पानी की आपूर्ति
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स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें तैनात
हालांकि, इन कदमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद इतने लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मुद्दा लापरवाही का है। विशेषज्ञों का कहना है कि
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पानी की नियमित जांच अनिवार्य है
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मानसून के समय जलस्रोतों की निगरानी और जरूरी हो जाती है
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शिकायतों को नजरअंदाज करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है
यही वजह है कि यह मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में पहुंच गया है।
हाईकोर्ट में आज सुनवाई क्यों अहम?
आज होने वाली सुनवाई में हाईकोर्ट प्रशासन से कई अहम सवाल पूछ सकता है, जैसे:
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दूषित पानी की सप्लाई के लिए कौन जिम्मेदार है?
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क्या समय पर चेतावनी और रोकथाम की गई?
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मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिलेगा या नहीं?
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भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस योजना है?
कोर्ट प्रशासन को फटकार लगा सकता है और जवाबदेही तय करने के निर्देश दे सकता है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने इसे “प्रशासनिक विफलता” करार दिया है, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों में आक्रोश है और कई इलाकों में प्रदर्शन की स्थिति भी बनी हुई है।
आगे की राह और जरूरी कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार और प्रशासन को:
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जल आपूर्ति सिस्टम का ऑडिट कराना चाहिए
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पुराने पाइपलाइन नेटवर्क को बदलना चाहिए
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पानी की क्वालिटी रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए
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आपात स्थिति में त्वरित मेडिकल रिस्पॉन्स सिस्टम मजबूत करना चाहिए
इंदौर में दूषित पानी से हुई 15 मौतें केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी चूक को उजागर करती हैं। आज होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई इस मामले में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। उम्मीद की जानी चाहिए कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।










