भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत: INS अरिदमन और INS तारागिरी हुए शामिल

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दिनांक: 03 अप्रैल, 2026

स्थान: विशाखापत्तनम

भारतीय नौसेना के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। हिंद महासागर में अपनी धाक जमाने के लिए भारत ने दो घातक योद्धाओं—परमाणु बैलिस्टिक पनडुब्बी INS अरिदमन (Aridhaman) और अत्याधुनिक स्टील्थ मिसाइल फ्रिगेट INS तारागिरी (Taragiri) को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया है।

INS अरिदमन: समंदर का अदृश्य परमाणु रक्षक

INS अरिदमन भारत की अरिहंत क्लास की तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है।

मारक क्षमता: यह पनडुब्बी K-4 (3500 किमी) और K-15 (750 किमी) मिसाइलों से लैस है।

विशेषता: यह 7,000 टन वजनी है और अपने पिछले संस्करणों (अरिहंत और अरिघात) से अधिक शक्तिशाली है। इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो भारत की ‘सेकंड स्ट्राइक’ (परमाणु हमले का जवाब देने की क्षमता) को कई गुना बढ़ा देती है।

INS तारागिरी: समंदर का नया शिकारी

प्रोजेक्ट 17A के तहत बनी INS तारागिरी एक स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है।

डिजाइन: इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आती।

हथियार: यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलों और अत्याधुनिक सेंसर से लैस है।

स्वदेशी ताकत: लगभग 75% स्वदेशी सामग्री के साथ, यह ‘मेक इन इंडिया’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

भारत के लिए क्यों है यह गर्व का पल?

इन दोनों युद्धपोतों के शामिल होने से भारत की ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ (जमीन, हवा और पानी से परमाणु हमला करने की क्षमता) और अधिक मजबूत हो गई है। दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में बढ़ती चुनौतियों के बीच, ये दोनों प्लेटफॉर्म भारत की समुद्री संप्रभुता के रक्षक बनेंगे।

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