नई दिल्ली में BRICS 2026 की औपचारिक शुरुआत
भारत ने अपनी BRICS 2026 की अध्यक्षता के तहत राजधानी New Delhi में पहली शेरपा और सू-शेरपा बैठक की मेजबानी शुरू कर दी है। यह बैठक वर्ष 2026 में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तय करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस बैठक में सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि समूह के विस्तार, वैश्विक आर्थिक नीतियों और बहुपक्षीय सहयोग के नए आयामों पर चर्चा कर रहे हैं। भारत की अध्यक्षता को ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
BRICS: उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मंच
BRICS पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—का समूह है, जिसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक संतुलन को मजबूत करना और विकासशील देशों के हितों की रक्षा करना है।
हाल के वर्षों में BRICS का प्रभाव लगातार बढ़ा है, और अब इसमें नए देशों को शामिल करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
भारत की 2026 अध्यक्षता के दौरान समूह के विस्तार और संस्थागत सुधारों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।
शेरपा और सू-शेरपा बैठक का महत्व
शेरपा और सू-शेरपा बैठकें BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारी का अहम हिस्सा होती हैं।
- शेरपा: सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि, जो राजनीतिक और रणनीतिक एजेंडे को अंतिम रूप देते हैं।
- सू-शेरपा: आर्थिक और तकनीकी मुद्दों पर चर्चा करने वाले अधिकारी।
इन बैठकों में लिए गए निर्णय बाद में शिखर सम्मेलन के एजेंडे का आधार बनते हैं।
नई दिल्ली में हो रही यह पहली बैठक 2026 के पूरे कार्यकाल की दिशा तय करेगी।
समूह विस्तार पर चर्चा
BRICS के हालिया विस्तार के बाद कई अन्य देश भी सदस्यता के इच्छुक हैं।
नई दिल्ली में हो रही बैठक में इस बात पर चर्चा की जा रही है कि भविष्य में किन मानकों और प्रक्रियाओं के तहत नए देशों को शामिल किया जाए।
विश्लेषकों का मानना है कि BRICS का विस्तार वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है और पश्चिमी संस्थाओं के विकल्प के रूप में इसकी भूमिका को मजबूत कर सकता है।
वैश्विक आर्थिक नीतियों पर फोकस
बैठक का एक प्रमुख एजेंडा वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति तैयार करना है।
मुख्य चर्चा बिंदु:
- वैश्विक मंदी की आशंकाएं
- आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में स्थिरता
- डिजिटल अर्थव्यवस्था
- स्थानीय मुद्रा में व्यापार
- विकास वित्त और निवेश
भारत की कोशिश होगी कि BRICS के जरिए विकासशील देशों को वित्तीय स्थिरता और निवेश के नए अवसर मिलें।
ग्लोबल साउथ की आवाज
भारत लंबे समय से ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक मंचों पर उठाने की वकालत करता रहा है।
BRICS 2026 की अध्यक्षता भारत को यह अवसर देती है कि वह विकासशील देशों की प्राथमिकताओं—जैसे जलवायु वित्त, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल समावेशन—को प्रमुखता से रख सके।
नई दिल्ली की बैठक में इन मुद्दों पर भी व्यापक विचार-विमर्श होने की संभावना है।
कूटनीतिक महत्व
BRICS मंच भारत की बहुपक्षीय कूटनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
नई दिल्ली में बैठक की मेजबानी भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि BRICS के जरिए भारत अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में योगदान दे सकता है।
भविष्य की दिशा
BRICS 2026 के दौरान कई मंत्रीस्तरीय और क्षेत्रीय बैठकें भी आयोजित की जाएंगी।
नई दिल्ली में शुरू हुई शेरपा बैठक पूरे वर्ष के एजेंडे की रूपरेखा तय करेगी।
इसमें डिजिटल सहयोग, हरित ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे विषयों पर भी पहल की जा सकती है।
संभावित परिणाम
- सदस्य देशों के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग
- स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा
- नए सदस्य देशों की स्पष्ट रूपरेखा
- विकासशील देशों के लिए वैकल्पिक वित्तीय ढांचा
भारत की अध्यक्षता में BRICS का एजेंडा अधिक समावेशी और विकासोन्मुखी होने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
नई दिल्ली में BRICS 2026 की पहली शेरपा और सू-शेरपा बैठक भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका का प्रतीक है।
समूह के विस्तार और भविष्य की आर्थिक नीतियों पर हो रही चर्चा आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
भारत की अध्यक्षता को ग्लोबल साउथ के लिए एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जहां विकास, सहयोग और बहुपक्षीय संतुलन को प्राथमिकता दी जाएगी।
आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि BRICS 2026 विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था में किस तरह की नई दिशा तय करता है।
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