नई दिल्ली में AI का महाकुंभ

भारत की राजधानी New Delhi अगले सप्ताह एक ऐतिहासिक वैश्विक आयोजन की मेजबानी करने जा रही है। ‘India-AI Impact Summit’ नामक यह शिखर सम्मेलन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में ग्लोबल साउथ का पहला बड़ा बहुपक्षीय मंच होगा।
इस सम्मेलन में 45 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ, उद्योग जगत के नेता और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres शामिल होंगे। यह आयोजन भारत की बढ़ती तकनीकी और कूटनीतिक भूमिका को भी दर्शाता है।
ग्लोबल साउथ के लिए क्यों खास है यह समिट?

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द उन विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को संदर्भित करता है, जो तकनीकी और आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रही हैं। AI जैसी उन्नत तकनीकें अक्सर विकसित देशों के प्रभुत्व में रही हैं, लेकिन यह समिट उस असंतुलन को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारत इस मंच के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि AI केवल तकनीकी क्रांति नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का माध्यम भी है।
सम्मेलन का मुख्य फोकस होगा:
- जिम्मेदार और नैतिक AI
- डेटा सुरक्षा और गोपनीयता
- AI के जरिए सतत विकास
- रोजगार और कौशल विकास
भारत की बढ़ती AI भूमिका

भारत तेजी से AI नवाचार के केंद्र के रूप में उभर रहा है। स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विशाल आईटी टैलेंट पूल ने देश को वैश्विक टेक हब बना दिया है।
‘India-AI Impact Summit’ इस दिशा में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को और मजबूत करेगा।
सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ और AI मिशन जैसी पहलें पहले ही टेक्नोलॉजी को आम नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। यह समिट इन पहलों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर देगा।
45+ देशों की भागीदारी
सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अन्य क्षेत्रों के 45 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इससे स्पष्ट है कि यह आयोजन केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक महत्व का है।
इन देशों के नीति-निर्माता AI के नियमन, निवेश और सहयोग के मॉडल पर चर्चा करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समिट भविष्य में बहुपक्षीय AI फ्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की भागीदारी
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की उपस्थिति इस सम्मेलन की वैश्विक गंभीरता को दर्शाती है।
UN लंबे समय से तकनीक के नैतिक उपयोग और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ AI को जोड़ने पर जोर देता रहा है।
इस मंच पर AI और मानवाधिकार, डिजिटल असमानता और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
उद्योग और स्टार्टअप्स के लिए अवसर
‘India-AI Impact Summit’ केवल नीति-निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें AI स्टार्टअप्स, टेक कंपनियों और निवेशकों के लिए नेटवर्किंग और साझेदारी के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
भारत के उभरते स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी तकनीक और नवाचार दिखाने का मौका मिलेगा।
इसके अलावा, AI-आधारित समाधानों को कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में लागू करने पर भी विचार किया जाएगा।
संभावित आर्थिक प्रभाव
AI को 21वीं सदी की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में AI वैश्विक अर्थव्यवस्था में खरबों डॉलर का योगदान देगा।
भारत इस समिट के जरिए AI निवेश और सहयोग आकर्षित कर सकता है, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
विशेष रूप से कौशल विकास और रिसर्च सहयोग पर जोर दिया जा सकता है।
नीति और नैतिकता पर फोकस
AI के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा गोपनीयता, एल्गोरिदमिक पक्षपात और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।
यह समिट जिम्मेदार AI फ्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में चर्चा का मंच बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्लोबल साउथ देश मिलकर साझा नीति ढांचा तैयार करते हैं, तो वे तकनीकी रूप से अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
निष्कर्ष
नई दिल्ली में आयोजित होने वाला ‘India-AI Impact Summit’ केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि वैश्विक AI परिदृश्य में बदलाव का संकेत है।
45 से अधिक देशों की भागीदारी और संयुक्त राष्ट्र महासचिव की उपस्थिति इसे ऐतिहासिक बनाती है।
यह आयोजन भारत की तकनीकी नेतृत्व क्षमता और ग्लोबल साउथ के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आने वाले वर्षों में AI नीति, निवेश और सहयोग के क्षेत्र में इस समिट के दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
अगर आप चाहें तो मैं इस खबर के लिए थंबनेल टेक्स्ट, यूट्यूब डिस्क्रिप्शन, या सोशल मीडिया कैप्शन भी तैयार कर सकता हूं।








