गंगासागर मेले में आगजनी: मकर संक्रांति से पहले बड़ा हादसा, लाखों का नुकसान
पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध गंगासागर मेला की शुरुआत से ठीक पहले एक भीषण आगजनी की घटना सामने आई है। इस हादसे में मेले के लिए लगाए गए कई अस्थायी टेंट, दुकानें और पंडाल जलकर खाक हो गए। आग से दुकानदारों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। राहत की बात यह रही कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
🔥 कैसे लगी आग?

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आग अस्थायी दुकानों के एक हिस्से में लगी और तेज़ हवा के कारण तेजी से फैल गई।
संभावित कारणों में—
- गैस सिलेंडर का रिसाव
- शॉर्ट सर्किट
- या खुले अलाव और बिजली के अस्थायी कनेक्शन
हालांकि, प्रशासन ने कहा है कि आग के सटीक कारणों की जांच की जा रही है।
🏕️ टेंट और दुकानें जलकर खाक
![]()
आग इतनी भयावह थी कि—
- कई पूजा सामग्री की दुकानें
- खाने-पीने के स्टॉल
- अस्थायी विश्राम टेंट
कुछ ही मिनटों में जलकर राख हो गए। दुकानदारों का कहना है कि—
- उनकी पूरी पूंजी इसी मेले पर निर्भर थी
- कई लोगों का साल भर का सामान नष्ट हो गया
पीड़ित दुकानदारों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।
🚒 दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं।
- स्थानीय पुलिस और स्वयंसेवकों ने भी मदद की
- काफी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया
- आसपास के क्षेत्रों को खाली कराया गया
दमकल अधिकारियों के अनुसार, अगर कुछ देर और होती तो आग पूरे मेला क्षेत्र में फैल सकती थी।
🧘♂️ श्रद्धालुओं में दहशत, लेकिन राहत भी
गंगासागर मेला हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
- आग की खबर से श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई
- लेकिन प्रशासन की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया
अधिकारियों ने बताया कि मेला शुरू होने से पहले सुरक्षा इंतजामों की दोबारा समीक्षा की जा रही है।
🌊 गंगासागर मेला: आस्था और परंपरा
गंगासागर मेला मकर संक्रांति पर आयोजित होता है, जहां श्रद्धालु गंगा और सागर के संगम में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।
यह मेला—
- कुंभ के बाद भारत का सबसे बड़ा धार्मिक मेला माना जाता है
- देश-विदेश से साधु-संत और श्रद्धालु आते हैं
ऐसे में आग की यह घटना प्रशासन के लिए बड़ी चेतावनी मानी जा रही है।
🏛️ प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि—
- हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं
- मेले के आयोजन पर कोई रोक नहीं
- प्रभावित दुकानदारों की सूची तैयार की जा रही है
संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार आर्थिक सहायता की घोषणा कर सकती है।
⚠️ सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं—
- क्या अस्थायी बिजली कनेक्शन सुरक्षित थे?
- गैस सिलेंडरों की पर्याप्त जांच हुई थी या नहीं?
- आग से निपटने के इंतजाम पर्याप्त थे या नहीं?
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े मेले में फायर सेफ्टी ऑडिट बेहद जरूरी है।
🔮 आगे की तैयारी और सबक
प्रशासन अब—
- अतिरिक्त दमकल टीमें तैनात करने
- बिजली और गैस कनेक्शनों की जांच
- दुकानदारों और स्वयंसेवकों को सुरक्षा निर्देश
जैसे कदम उठा रहा है, ताकि मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
📝 निष्कर्ष
गंगासागर मेले से पहले लगी यह आगजनी की घटना भले ही बिना जनहानि के समाप्त हो गई हो, लेकिन इसने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। लाखों का नुकसान झेल रहे दुकानदारों के लिए राहत और मुआवजा अब सबसे बड़ी जरूरत है। साथ ही, आने वाले दिनों में मेला सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो—यह सुनिश्चित करना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी होगी।








