दिल्ली-NCR में ‘खतरनाक’ स्‍तर पर वायु प्रदूषण: Supreme Court of India की सख्‍त टिप्पणी

दिल्ली-NCR में 'खतरनाक' प्रदूषण, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
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भारत की राजधानी क्षेत्र यानी Delhi-NCR में वायु प्रदूषण की स्थिति एक बार फिर बेहद गंभीर हो गई है। हालाँकि हर साल इस तरह की समस्या सामने आती है, लेकिन इस बार हालात ‘खतरनाक’ (Severe) श्रेणी तक पहुंच गए हैं, जिससे स्वास्थ्य को गहरा जोखिम है। साथ ही, Supreme Court of India ने इस पर सख्‍त टिप्पणी की है — उन्होंने कहा है कि “यह स्थिति सेहत को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है” और मास्क अब पर्याप्त नहीं हैं।

इस लेख में हम देखेंगे कि क्या हालात हैं, किन कारणों से यह हुआ, कौन-सी कदम उठाए गए हैं और आम नागरिक को क्या सावधानी बरतनी चाहिए।


वर्तमान स्थिति

– दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार ‘Severe’ श्रेणी में दर्ज हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ स्थानों पर AQI 425 से ऊपर भी गया है।
– इसके कारण उन लोगों को भी सांस लेने में परेशानी हो रही है, जिन्हें पहले आमतौर पर समस्याएँ नहीं होती थीं।
– सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि “मास्क भी पर्याप्त नहीं हैं” और “यह प्रदूषण स्थायी रूप से स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकती है”।
– न्यायालय ने वकीलों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए सुनवाई करने का सुझाव दिया है ताकि वे इस जहरीली हवा में कोर्ट-कक्ष आने-जाने से खुद को बचा सकें।


कारण क्या हैं?

वायु प्रदूषण की इस तीव्र बढ़ोतरी के पीछे कई पीछे-छेद कारण हैं:

  • मौसम-सम्बंधित परिस्थितियाँ — ठहरी हवा, रात में तापमान कम होना, इनवर्शन (मिट्टी/हवा नीचे दबाव में गिरना) के कारण धुएँ व प्रदूषक ऊपर नहीं उठ पाते।
  • वाहनों की बढ़ती संख्या, पुराने-उपकरण वाले वाहन, निर्माण-धूल, खुला कचरा जलाना व विशेष रूप से आसपास के राज्यों में पराली/धान की पुताई के बाद कटाई-बाद जलाने की प्रथा।
  • मुख्यतर यह कि प्रशासनिक-तंत्र को समय पर कड़े कदम उठाने में देरी हुई है, जिसके प्रति न्यायालय ने भी चिन्ता जताई है।

प्रशासन की कार्रवाई — GRAP-3 लागू

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, Commission for Air Quality Management (CAQM) ने Graded Response Action Plan (GRAP) के Stage III नियम लागू कर दिए हैं

Stage III के अंतर्गत कुछ मुख्य प्रतिबंध निम्नलिखित हैं:

  • गैर-आवश्यक निर्माण व उसके लिए उपयोग की जाने वाली गतिविधियों पर रोक जैसे मिट्टी खोदना, पाइलिंग, ओपन ट्रेंचिंग, तैयार-मिश्रित कंक्रीट (RMC) प्लांट आदि।
  • पुरानी पेट्रोल/डीजल वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित; BS-III पेट्रोल व BS-IV डीजल चार-पहिया गाड़ियों पर रोक।
  • स्कूलों में कक्षाओं को हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन + ऑफलाइन) करवाना, विशेष रूप से कक्षा 1-5 के लिए।
  • निर्माण सामग्री-परिवहन (cement, sand, flyash) को बिना पक्के मार्गों से ले जाने पर रोक।

प्रशासन ने कहा है कि इन उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है ताकि हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सके और जनता विशेषकर बच्चों, बुज़ुर्गों व सांस की बीमारी वाले लोगों को राहत मिल सके।


प्रभाव व स्वास्थ्य-चिंता

  • ‘Severe’ श्रेणी में AQI का मतलब है कि हर कोई प्रभावित हो सकता है, जो कि पहले “सुरक्षित” माना जाता था। बच्चों, बूढ़ों, हृदय-या फेफड़े की समस्या वालों को विशेष खतरा है।
  • न्यायालय के अनुसार, साधारण मास्क भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते हैं। “Even masks are not enough. They will not suffice.” यह स्पष्ट संकेत है कि हवा में मौजूद प्रदूषक मात्र अधिक मात्रा में लग रहे हैं।
  • लंबे समय तक ऐसे प्रदूषण में रहने से स्वास्थ्य पर स्थायी प्रभाव भी पड़ सकते हैं जैसे फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी, हृदय-घटित जोखिम बढ़ना आदि। न्यायालय ने ‘यह स्थायी नुकसान पहुँचा सकती है’ कह कर चेताया।

आम नागरिक के लिए सुझाव

यदि आप दिल्ली-NCR क्षेत्र में हैं या वहाँ जा रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • बाहर निकलते समय उच्च गुणवत्ता वाला मास्क (जैसे N95/KN95) पहनें, एवं mümkün हो तो पूरी तरह बंद मास्क का इस्तेमाल करें।
  • बाहर की गतिविधियाँ, विशेषकर सूर्यास्त के बाद या हवा बहुत ठहर हुए दिन में, कम करें।
  • बच्चों, बूढ़ों व स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को संध्या-काल या सुबह-बहुत जल्दी की सैर से बचाएँ।
  • घर के अंदर भी हवा को शुद्ध रखने के लिए एयर प्यूरीफायर या हवा के फिल्टर का उपयोग करें; खिड़कियाँ व सर्दियों में वेंटिलेशन का ध्यान रखें।
  • वाहन का उपयोग कम करें, सार्वजनिक परिवहन व कैरपूलिंग को प्राथमिकता दें। निर्माण-काम, खुला कचरा जलाना व पराली जलाना आदि को प्रोत्साहन न दें।
  • यदि संभव हो तो स्कूल-काम या ऑफिस के लिए वर्क फ्रॉम होम विकल्प पर विचार करें।

आगे क्या देखना है?

  • न्यायालय ने सरकारों (उदाहरणार्थ Punjab व Haryana) से पराली जलाने व ट्रांसपोर्ट-प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए रिपोर्ट माँगी है।
  • हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए मौसम-सापेक्ष उपाय, धूल नियंत्रण, पुराने वाहनों का निष्कासन व निर्माण-क्रियाओं का प्रबंधन जरूरी है।
  • यदि GRAP-3 में भी सुधार न मिले, तो अगले स्तर (Stage IV) की बात हो सकती है, जिसमें और कड़े प्रतिबंध होंगे।
  • सार्वजनिक जागरूकता व नागरिक सहभागिता महत्वपूर्ण होगी—भूमि-जल प्रबंधन, खुले-कचरा जलने का विरोध व स्थायी यातायात-पद्धति अपनाना शामिल हैं।

निष्कर्ष

दिल्ली-NCR की वायु स्थिति अब सिर्फ “खराब” नहीं, बल्कि खतरनाक स्तर पर है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी — “यह स्थायी नुकसान पहुँचा सकती है” — बहुत साफ संकेत है कि समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता। GRAP-3 जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन गहरी समझ, नागरिक भागीदारी और निरंतर निगरानी के बिना समस्या जमीनी रूप से नहीं सुधरेगी। हर व्यक्ति की सुरक्षा और साझी जिम्मेदारी इस संकट से लड़ने में अहम होगी।

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