भारी अंक झाड़ू — जब शहर पर छा गई ‘स्लो मोशन’ धुंध
आज दिल्ली तथा उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) इलाके में वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में है। शहर-का-शहर धुंध की मोटी चादर में लिपटा हुआ नजर आ रहा है और AQI यानि वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘बहुत खराब’ या उससे भी ऊपर स्तर दर्ज कर रहा है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में AQI 300 से ऊपर पहुंचा था, कुछ स्थानों पर यह ≈ 388 तक रिकॉर्ड हुआ।
नतीजा यह है कि आम नागरिकों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है, आँखें झल रही हैं, गला खऱोद रहा है और especially बच्चों, बुज़ुर्गों व पहले से बीमार लोगों के लिए ये हालात चिंताजनक हो गए हैं।
कारण क्या हैं? — वायु कितनी जल्दी जहरीली हो गई
यहाँ कुछ मुख्य कारण हैं जिनकी वजह से दिल्ली-NCR में अचानक प्रदूषण का स्तर बढ़ा है:
- वायुमंडलीय बदलाव: हवा का बहाव कम हो गया है, ठंडी हवा के कारण प्रदूषक नीचे ही ठहर रहे हैं।
- परदूषण स्रोतों का संगम: वाहनों का धुँआ, निर्माण-धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और आसपास के राज्यों से आए कचरा-जलने व पराली जलने जैसी गतिविधियाँ मिलकर हवा को जहरीला बना रही हैं।
- मौसम-सहायक कारक: तापमान में गिरावट, हवा की गति कम होना, रात में कोहरे का बढ़ना — ये सभी मिलकर स्मॉग को बने रहने और गहराने में मददगार साबित हो रहे हैं।
स्वास्थ्य पर असर — ये सिर्फ धुंध नहीं, खतरनाक स्थिति है
जब AQI ‘बहुत खराब’ या ‘खतरनाक’ श्रेणी में आ जाता है, तो स्वास्थ्य पर इसका असर गहरा होता है। हाल ही में किए गए सर्वे में यह पाया गया है कि दिल्ली-NCR के लगभग 42 % घरों में एक या अधिक सदस्यों को गले में खराश या खाँसी की शिकायत थी, 25 % ने आँखों में जलन, सिरदर्द या नींद न आने जैसी समस्याएँ बताईं, जबकि 17 % ने साँस लेने में तकलीफ या अस्थमा की बिगड़ती स्थिति को दर्ज किया।
उन लोगों के लिए जो पहले से फेफड़े या हृदय से संबंधित समस्या से जूझ रहे हैं, स्थिति और भी जोखिम-भरी है। स्वास्थ्य विभाग एवं विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि इन हालातों में बाहर निकलते समय मास्क पहनना, बाहरी कसरत कम करना तथा यदि संभव हो तो अंदर के वातावरण को फिल्टर करना बेहद महत्वपूर्ण है।
वर्तमान स्थिति क्या है?
- दिल्ली में कुछ मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI ने सुबह-सवेरे 388 तक पहुँच गया था।
- नोएडा में ऑब्ज़र्व किया गया कि AQI औसतन ≈ 348 पर पहुँच गया था और कुछ सेक्टरों में 350+ के पार था।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले कुछ दिनों में वायु गुणवत्ता और खराब होने की संभावना है।
सरकार-और-प्रशासन क्या कर रहे हैं?
प्रशासन ने प्रतिक्रिया की है और कुछ कदम उठाए जा रहे हैं:
- Commission for Air Quality Management (CAQM) ने ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत Stage II इमप्लीमेंट किया है, जिसमें धूल नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन बढ़ाना, डीजल जनरेटर प्रयोग सीमित करना आदि शामिल है।
- सड़क-पर नियमित पानी छिड़काव और सफाई बढ़ाई गई है ताकि धूल को नियंत्रित किया जा सके।
- प्रशासन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य की चेतावनी जारी की है जिसमे कहा गया है कि यदि बाहरी गतिविधियाँ जरूरी न हों, तो घर में रहना बेहतर है, विशेषकर संवेदनशील समूहों के लिए।
हम क्या कर सकते हैं? — कुछ सरल लेकिन असरदार सुझाव
आप भी अपनी सुरक्षा के लिए निम्न उपाय अपना सकते हैं:
- माक्स का इस्तेमाल करें (विशेषकर PM₂.₅ फिल्टर वाला मास्क) जब बाहर जाना हो।
- घर के अंदर हवा शुद्ध रखने के लिए एयर प्यूरीफायर या कम-से-कम हवादार माहौल बनाएं।
- बाहर सुबह-शाम बहुत कम गति से धूल-धुआँ फैलता है — ऐसे समय में बाहर की गतिविधियाँ कम करें।
- पौष्टिक आहार लें, खूब पानी पिएँ ताकि शरीर में धूल-कणों का असर कम हो सके।
- यदि होंथोड़ी खाँसी, आँखों में जलन हो रही हो या साँस लेने में कठिनाई लगे — तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
- निजी वाहन का कम प्रयोग करें, जितना हो सके सार्वजनिक परिवहन भर्ती करें — इससे स्रोत-से-उत्सर्जन कम होगा।
लंबे समय के लिए क्या जरूरी है?
यह समस्या सिर्फ कुछ दिनों का नहीं है — दिल्ली-NCR के लिए यह एक नियमित चुनौती है। अक्टूबर-नवम्बर के समय मौसम व स्रोत दोनों मिलकर ऐसे हालात बनाते हैं। (AQI)
हमें चाहिए:
- प्रभावी योजना और समन्वित क्रियान्वयन — वाहनों, उद्योगों, निर्माण-धूल व कृषि जलने-बॉलर जैसे स्रोतों पर नियंत्रण।
- नवीन तकनीक का प्रयोग — बेहतर मॉनिटरिंग, पूर्वानुमान, वायु-शोधन उपाय।
- नागरिक-भागीदारी — जागरूकता, व्यवहार में बदलाव जैसे कम निजी वाहन, सजगता।
- मेट्रो-परिवहन, हरित क्षेत्र वृद्धि और धूल-नियंत्रण सख्त बनाना।
निष्कर्ष
धुंध और प्रदूषण की यह मोटी चादर केवल दृश्य रूप से ही भयावह नहीं है — यह हमारी सेहत के लिए वास्तविक खतरा है। दिल्ली-NCR में आज जिस वायु-गुणवत्ता की स्थिति बनी है, वह हमें यह याद दिलाती है कि स्वच्छ हवा सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि जीवन-रक्षक आवश्यकता है।
इसलिए — जब बाहर निकलें, तो सावधानी बरतें; जब घर हों, तो वातावरण को समझदारी से नियंत्रित करें; और जब समाज-स्तर पर देखें — तो मिलकर इस समस्या को जड़ से खत्म करने का प्रयास करें। धरती को, हमारे शहर को और हमारी सांसों को एक बेहतर कल देना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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