🇮🇳🇨🇦 भारत–कनाडा संबंधों में नई पहल: साझा कार्य योजना से भरोसे की वापसी
भारत और कनाडा के रिश्ते बीते कुछ समय से तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे थे। राजनयिक बयानबाज़ी, सुरक्षा चिंताएं और आपसी अविश्वास ने द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया। ऐसे समय में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval की ओटावा यात्रा और उसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा व कानून प्रवर्तन पर एक ‘साझा कार्य योजना’ (Work Plan) पर सहमति को बेहद अहम माना जा रहा है। यह कदम दोनों देशों के रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में एक ठोस प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
🤝 साझा कार्य योजना: क्या है यह पहल?
भारत और कनाडा के बीच बनी यह साझा कार्य योजना मुख्य रूप से तीन बड़े क्षेत्रों पर केंद्रित है:
- राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग – आतंकवाद, उग्रवाद और संगठित अपराध से निपटने के लिए खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान।
- कानून प्रवर्तन एजेंसियों का समन्वय – जांच एजेंसियों के बीच सीधा संपर्क, संयुक्त प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग।
- सीमा पार अपराधों पर नियंत्रण – अवैध फंडिंग, ड्रग तस्करी और चरमपंथी नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई।
इस योजना का उद्देश्य केवल कागजी समझौता नहीं, बल्कि व्यावहारिक स्तर पर सहयोग को मजबूत करना है।
🛡️ अजीत डोवाल की ओटावा यात्रा का महत्व
NSA अजीत डोवाल की यह यात्रा कई मायनों में खास रही। यह यात्रा ऐसे समय पर हुई जब भारत लगातार यह चिंता जताता रहा है कि कनाडा की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। डोवाल ने कनाडाई अधिकारियों के साथ साफ शब्दों में भारत की सुरक्षा चिंताओं को रखा और यह संदेश दिया कि आतंकवाद और उग्रवाद पर किसी भी तरह की ढिलाई द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती है।
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत में खुलापन और व्यावहारिकता देखने को मिली, जिसने साझा कार्य योजना की राह आसान की।
🌍 मार्क कार्नी की भारत यात्रा से पहले बड़ा संकेत
यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले हुआ है। माना जा रहा है कि यह यात्रा द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा देने का अवसर बनेगी।
साझा कार्य योजना इस बात का संकेत है कि दोनों देश टकराव की राजनीति से आगे बढ़कर संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहते हैं। इससे प्रधानमंत्री स्तर की बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल तैयार होगा।
📉 पिछले तनावों की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों में भारत–कनाडा संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए। भारत ने बार-बार यह मुद्दा उठाया कि कुछ अलगाववादी तत्व कनाडा में खुलेआम भारत विरोधी गतिविधियां चला रहे हैं। दूसरी ओर, कनाडा ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला दिया।
इन मतभेदों ने व्यापार, शिक्षा और लोगों के आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों को भी प्रभावित किया। ऐसे में साझा कार्य योजना को विश्वास बहाली (Confidence Building Measure) के तौर पर देखा जा रहा है।
💼 व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर असर
सुरक्षा सहयोग मजबूत होने का सीधा असर आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों पर भी पड़ता है। भारत और कनाडा के बीच:
- शिक्षा और स्टूडेंट मोबिलिटी
- स्वच्छ ऊर्जा और टेक्नोलॉजी
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग
जैसे क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं हैं। सुरक्षा संबंधी मतभेद कम होने से इन क्षेत्रों में भी नई गति आने की उम्मीद है।
🔮 आगे की राह: क्या बदलेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि साझा कार्य योजना को ईमानदारी से लागू किया गया, तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं:
- आतंकवाद और उग्रवाद पर ठोस कार्रवाई
- द्विपक्षीय विश्वास में सुधार
- उच्च स्तरीय राजनीतिक संवाद में तेजी
- आम नागरिकों और प्रवासी भारतीयों के लिए बेहतर माहौल
हालांकि, यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश केवल सहमति तक सीमित रहते हैं या ज़मीन पर भी ठोस कदम उठाते हैं।
🧠 समाधान
भारत और कनाडा के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन पर साझा कार्य योजना सिर्फ एक कूटनीतिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि रिश्तों को नई शुरुआत देने की कोशिश है। अजीत डोवाल की ओटावा यात्रा और मार्क कार्नी की प्रस्तावित भारत यात्रा इस बात का संकेत देती है कि दोनों देश पुराने मतभेदों से आगे बढ़कर भविष्य की ओर देखना चाहते हैं।
अगर यह पहल सफल होती है, तो यह न केवल भारत–कनाडा संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग का एक सकारात्मक उदाहरण भी पेश करेगी।








