भारत की ‘अस्त्र-II’ मिसाइल अब और घातक होगी, 200 किलोमीटर से अधिक रेंज के साथ वायुसेना को नई शक्ति मिलेगी
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2025:
भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को एक और ऊँचाई पर पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने घोषणा की है कि देश में विकसित ‘अस्त्र-II’ हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Air-to-Air Missile) की रेंज को अब 200 किलोमीटर से अधिक किया जा रहा है।
पहले इस मिसाइल की रेंज 160 किलोमीटर तक प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे और शक्तिशाली बनाया जाएगा।
अस्त्र-II: भारत की अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली का नया अध्याय
‘अस्त्र-II’ मिसाइल, भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक का एक बेहतरीन उदाहरण है।
यह ‘फायर एंड फॉरगेट’ (Fire and Forget) और ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ (Beyond Visual Range – BVR) क्षमता से लैस है, यानी एक बार छोड़े जाने के बाद यह मिसाइल अपने लक्ष्य को स्वयं खोजकर नष्ट करने में सक्षम है।
इससे भारतीय वायुसेना को दुश्मन के विमानों को देखे बिना भी मार गिराने की क्षमता मिलेगी।
कौन-कौन से विमान होंगे सुसज्जित?
अस्त्र-II मिसाइल को सुखोई-30MKI, मिग-29, और स्वदेशी तेजस (LCA) लड़ाकू विमानों पर तैनात किया जाएगा।
भविष्य में इसे राफेल और AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) जैसे अत्याधुनिक विमानों में भी एकीकृत करने की योजना है।
इससे भारत की हवाई सीमाओं की सुरक्षा और मजबूत होगी और लंबी दूरी के दुश्मन लक्ष्यों को भी नष्ट करने की क्षमता बढ़ेगी।
200 किलोमीटर की जबरदस्त रेंज: भारत की हवाई ताकत में इजाफा
अस्त्र-II मिसाइल का नया संस्करण 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य को निशाना बना सकेगा।
यह रेंज भारतीय वायुसेना को चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के खिलाफ रणनीतिक बढ़त दिलाएगी, जहां हवाई युद्ध में दूरी का महत्व सबसे ज्यादा होता है।
यह मिसाइल Mach 4.5 (यानी आवाज की गति से लगभग साढ़े चार गुना तेज) की गति से उड़ सकती है, और उच्च ऊँचाई पर भी लक्ष्य को सटीकता से मार सकती है।
अस्त्र-II की प्रमुख विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मिसाइल प्रकार | हवा से हवा में मार करने वाली (Air-to-Air) |
| रेंज | 200 किलोमीटर से अधिक |
| गति (Speed) | Mach 4.5 |
| वारहेड क्षमता | 15-20 किलोग्राम उच्च विस्फोटक वारहेड |
| गाइडेंस सिस्टम | एक्टिव रडार होमिंग और इनर्शियल नेविगेशन |
| लॉन्च प्लेटफॉर्म | सुखोई-30MKI, तेजस, मिग-29 |
यह मिसाइल सभी मौसमों में काम करने में सक्षम है और इसमें जैमिंग रेसिस्टेंट सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे दुश्मन का रडार या इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम इसे रोक नहीं सकता।
‘फायर एंड फॉरगेट’ — आधुनिक युद्ध की जरूरत
‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक का मतलब है कि एक बार मिसाइल को लॉन्च करने के बाद उसे किसी मानव निर्देश की आवश्यकता नहीं होती।
अस्त्र-II अपने लक्ष्य को स्वयं पहचानती है और उसका पीछा करते हुए सटीक वार करती है।
इस तकनीक से वायुसेना के पायलट सुरक्षित दूरी से ही हमले कर सकते हैं, जिससे उनकी जान का जोखिम कम होता है।
‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ क्षमता — आसमान में अदृश्य वार
अस्त्र-II की Beyond Visual Range (BVR) क्षमता का मतलब है कि यह मिसाइल अपने लक्ष्य को 200 किमी दूर तक भी निशाना बना सकती है — यानी पायलट को दुश्मन का विमान देखने की भी जरूरत नहीं होगी।
यह तकनीक अमेरिका की AIM-120 AMRAAM, चीन की PL-15, और रूस की R-77 मिसाइलों जैसी श्रेणी में भारत को ला खड़ा करती है।
DRDO की उपलब्धि — आत्मनिर्भर भारत की मिसाल
अस्त्र-II मिसाइल का विकास DRDO के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL), हैदराबाद में किया गया है।
यह प्रोजेक्ट पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिसमें कोई विदेशी कंपोनेंट नहीं है।
यह भारत की “Make in India” और “Atmanirbhar Bharat” पहल को मजबूती देता है।
DRDO अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के तहत आने वाले महीनों में अस्त्र-II का अंतिम परीक्षण किया जाएगा और इसके बाद इसे भारतीय वायुसेना को सौंपा जाएगा।
भारत की मिसाइल शक्ति में निरंतर उन्नति
अस्त्र-II से पहले भारत ने अस्त्र-I को सफलतापूर्वक तैनात किया था, जिसकी रेंज करीब 110 किमी है।
अस्त्र-II इस सीरीज़ की उन्नत मिसाइल है, जो लंबी दूरी, अधिक गति और बेहतर गाइडेंस सिस्टम से लैस है।
भविष्य में DRDO अस्त्र-III पर भी काम शुरू करने की योजना बना रहा है, जिसकी रेंज 300 किमी तक हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय तुलना
| देश | मिसाइल | अधिकतम रेंज |
|---|---|---|
| अमेरिका | AIM-120 AMRAAM | 180 किमी |
| चीन | PL-15 | 200 किमी |
| रूस | R-77 | 160 किमी |
| भारत | Astra-II | 200+ किमी |
इस तुलना से साफ है कि भारत की अस्त्र-II मिसाइल अब विश्व के शीर्ष एयर-टू-एयर मिसाइल क्लब में शामिल हो चुकी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा में नई क्रांति
अस्त्र-II का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब भारत को विदेशी मिसाइलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
अब तक वायुसेना को फ्रांस, रूस या अमेरिका से मिसाइलें खरीदनी पड़ती थीं, लेकिन अस्त्र-II के आने से भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाएगा।
इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि भारत मिसाइल निर्यातक देशों की श्रेणी में भी कदम रख सकेगा।
आत्मनिर्भर भारत की उड़ान
अस्त्र-II मिसाइल सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक और रणनीतिक क्षमता का प्रतीक है।
200 किलोमीटर से अधिक रेंज, फायर एंड फॉरगेट सिस्टम, और BVR तकनीक के साथ यह मिसाइल भारतीय वायुसेना को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब न केवल रक्षा में आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सैन्य तकनीक में अग्रणी बनने की दिशा में भी तेजी से बढ़ रहा है।
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