राम अवतार जग्गी हत्याकांड: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अमित जोगी को सुनाई उम्रकैद की सजा, 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में सोमवार को हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने इस फैसले के साथ ही 2007 में आए निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के उस आदेश को पलट दिया है, जिसमें अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
हाईकोर्ट के फैसले की मुख्य बातें:
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सजा का आधार: कोर्ट ने अमित जोगी को हत्या (धारा 302) और आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) के तहत दोषी पाया।
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अर्थदंड: उम्रकैद के साथ उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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सरेंडर का समय: हाईकोर्ट ने अमित जोगी को 3 सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।
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ट्रायल कोर्ट पर टिप्पणी: हाईकोर्ट ने अमित जोगी को बरी करने के पुराने फैसले को ‘अवैध और साक्ष्यों के विपरीत’ बताया।
क्या था राम अवतार जग्गी हत्याकांड?
4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के तत्कालीन कोषाध्यक्ष राम अवतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की सरकार थी। इस मामले की जांच बाद में CBI को सौंपी गई थी। CBI ने अपनी चार्जशीट में अमित जोगी को इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड बताया था।
2007 में ट्रायल कोर्ट ने अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई थी, लेकिन अमित जोगी को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी और CBI ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर अब यह फैसला आया है।
सतीश जग्गी की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद दिवंगत नेता के पुत्र सतीश जग्गी ने कहा, “यह सत्य की जीत है। 23 साल के लंबे इंतजार के बाद मेरे पिता को न्याय मिला है। हमने हमेशा न्यायपालिका पर भरोसा रखा।”




