
TMC के 13 राज्यसभा सांसदों पर BJP की नजर, टूट की अटकलें तेज
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 28 लोकसभा सांसदों में से 15 सांसदों ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रति अपना समर्थन जताया। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही 5 अन्य सांसद भी उनके साथ जुड़ सकते हैं। इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल में पहले TMC विधायकों द्वारा की गई बगावत की पुनरावृत्ति के रूप में देखा जा रहा है।
संसदीय स्तर पर इस विद्रोह का नेतृत्व बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने किया। उनके साथ घाटाल से सांसद और टॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता देव अधिकारी तथा वरिष्ठ अभिनेत्री एवं सांसद शताब्दी रॉय समेत कई अन्य सांसद भी शामिल बताए जा रहे हैं।
एक ओर ममता बनर्जी संविधान क्लब में BJP के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता की रणनीति तैयार करने में जुटी थीं, वहीं दूसरी ओर उनकी पार्टी के असंतुष्ट सांसद कुछ ही किलोमीटर दूर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के सरकारी आवास पर अलग राजनीतिक समीकरण साधने में लगे हुए थे।
सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के करीब 15 लोकसभा सांसद भूपेंद्र यादव के आवास पर मौजूद थे। इस बैठक में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी की भी उपस्थिति बताई जा रही है। इस घटनाक्रम ने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
TMC में बगावत के संकेत, कई सांसदों ने NDA को समर्थन देने का किया दावा
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 28 लोकसभा सांसदों में से 15 सांसदों ने सोमवार को कथित तौर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर NDA के प्रति अपना समर्थन जताया। सूत्रों के अनुसार, पांच अन्य सांसद भी जल्द ही इस पहल में शामिल हो सकते हैं। इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल में पहले TMC विधायकों द्वारा किए गए विद्रोह की पुनरावृत्ति के रूप में देखा जा रहा है।
इस संसदीय बगावत का नेतृत्व बारासात सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने किया। उनके साथ घाटाल सांसद और टॉलीवुड अभिनेता देव अधिकारी, वरिष्ठ अभिनेत्री एवं सांसद शताब्दी रॉय सहित कई अन्य सांसद भी शामिल बताए जा रहे हैं।
एक ओर जहां ममता बनर्जी संविधान क्लब में BJP के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता की रणनीति बनाने में व्यस्त थीं, वहीं दूसरी ओर असंतुष्ट सांसद केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के सरकारी आवास पर जुटे हुए थे। सूत्रों के मुताबिक, वहां करीब 15 TMC सांसद मौजूद थे और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
बताया गया है कि TMC के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय भी वहां मौजूद थे। उन्होंने सोमवार को राज्यसभा से इस्तीफा देते हुए पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए।
BJP सूत्रों का दावा है कि 15 सांसदों ने एक अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता पाने के लिए पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और अन्य सांसद भी दिल्ली पहुंचकर इसमें शामिल हो सकते हैं। काकोली घोष दस्तिदार ने पत्रकारों से कहा कि लगभग 20 सांसदों ने BJP नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देने का फैसला किया है।
हालांकि, बर्धमान-दुर्गापुर से सांसद कीर्ति आजाद ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि केवल 13 सांसदों ने ही पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए 28 में से कम से कम 19 सांसदों का एक साथ अलग होना आवश्यक होगा।
शाम के समय शताब्दी रॉय के दिल्ली स्थित आवास पर असंतुष्ट सांसदों और सुवेंदु अधिकारी की एक अनौपचारिक बैठक भी हुई। BJP नेताओं का दावा है कि बागी गुट को करीब 22 सांसदों का समर्थन प्राप्त है और सभी हस्ताक्षर मिलने के बाद पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में प्रक्रिया पूरी होने के बाद TMC के राज्यसभा सांसदों के बीच भी समर्थन जुटाने की कोशिश शुरू की जा सकती है। बताया जा रहा है कि कुछ राज्यसभा सांसद पहले ही इस अभियान के प्रति सकारात्मक रुख दिखा चुके हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
किर्ती आजाद और महुआ मोइत्रा का पलटवार, बागी सांसदों पर साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस में कथित बगावत की खबरों के बीच पार्टी नेताओं ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। सांसद कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ममता बनर्जी द्वारा जारी एक पत्र साझा किया, जिसमें काकोली घोष दस्तिदार को लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) पद से हटाकर उनकी जगह श्रीरामपुर सांसद कल्याण बनर्जी को नियुक्त किया गया है।
किर्ती आजाद ने X पर लिखा, “सवाल यह है कि BJP आखिर कब तक लोगों को गुमराह करती रहेगी?”
वहीं कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वर्ष 2024 में चुने गए सांसद तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जनता द्वारा निर्वाचित हुए थे और उन्हें NDA के समर्थन का जनादेश नहीं मिला था। उन्होंने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे BJP के साथ जाना चाहते हैं तो पहले सांसद पद से इस्तीफा दें और फिर BJP के टिकट पर चुनाव लड़कर जनता का समर्थन साबित करें।
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि BJP द्वारा इस संभावित विभाजन को समर्थन देने के पीछे एक प्रमुख कारण लोकसभा में NDA की संख्या को मजबूत करना है। आने वाले समय में संसद में कई महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर सरकार को संख्या बल की आवश्यकता पड़ सकती है।
बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार एक नया परिसीमन (Delimitation) विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन का प्रस्ताव शामिल हो सकता है। विपक्षी दलों का मानना है कि इससे BJP को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले इसी तरह के एक प्रस्ताव से जुड़े संवैधानिक संशोधन को विपक्षी दलों की एकजुटता के कारण सरकार को वापस लेना पड़ा था। उस समय तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मिलकर इसका विरोध किया था।




