सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने अग्रिम जमानत बढ़ाने की याचिका की खारिज
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा (Pawan Khera) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी ट्रांजिट अग्रिम जमानत (Transit Anticipatory Bail) की अवधि को बढ़ाने की मांग की थी।
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने स्पष्ट किया कि खेड़ा को अब राहत के लिए संबंधित निचली अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR से जुड़ा है, जो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ खेड़ा द्वारा की गई कथित टिप्पणियों के बाद दर्ज हुई थी।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान अदालत ने निम्नलिखित प्रमुख बातें कहीं:
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जमानत विस्तार से इनकार: कोर्ट ने खेड़ा की उस मांग को स्वीकार नहीं किया जिसमें उन्होंने मंगलवार तक का समय मांगा था।
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निचली अदालत का अधिकार: बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता (पवन खेड़ा) संबंधित कोर्ट में जाने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि वहां अदालतें बंद हैं, तो वे तत्काल सुनवाई के लिए रजिस्ट्री से संपर्क कर सकते हैं।
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निष्पक्ष सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत को इस मामले पर बिना किसी पिछले आदेश (सुप्रीम कोर्ट या तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश) से प्रभावित हुए, अपनी मेरिट के आधार पर फैसला लेना चाहिए।
पृष्ठभूमि
इससे पहले, तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की राहत प्रदान की थी। हालांकि, असम पुलिस ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। खेड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया था कि अदालतों की छुट्टी होने के कारण उन्हें और समय मिलना चाहिए, लेकिन बेंच इससे सहमत नहीं हुई।
आगे क्या?
पवन खेड़ा को अब असम की संबंधित कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करना होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय अदालत इस मामले में उन्हें क्या राहत देती है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा की अवधि बढ़ाने से साफ मना कर दिया है।








