Sabarimala Case Hearing Day 3: 9-Judge Bench Reviews 2018 Verdict | Latest Updates

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सबरीमाला मंदिर मामला: 9 जजों की बेंच में सुनवाई का तीसरा दिन, 2018 के फैसले पर दोबारा विचार

नई दिल्ली: सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ में आज सुनवाई का तीसरा दिन है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली यह पीठ 2018 के उस ऐतिहासिक फैसले की समीक्षा कर रही है, जिसमें 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगी रोक को हटा दिया गया था।

आज की सुनवाई के मुख्य बिंदु:

  • संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality): कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या ‘संवैधानिक नैतिकता’ धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 25 और 26) से ऊपर है।

  • धार्मिक प्रथाएं और कोर्ट का हस्तक्षेप: सुनवाई के दौरान यह सवाल उठा कि क्या अदालतें यह तय कर सकती हैं कि कौन सी धार्मिक प्रथा ‘अनिवार्य’ (Essential Religious Practice) है और कौन सी नहीं।

  • केंद्र सरकार का रुख: केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि धार्मिक मान्यताओं को केवल तर्क की कसौटी पर नहीं तौला जाना चाहिए।

क्या था 2018 का फैसला?

2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने 4:1 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लैंगिक भेदभाव है और असंवैधानिक है। इसके बाद दायर पुनर्विचार याचिकाओं के कारण मामले को 9 जजों की बड़ी पीठ को भेज दिया गया था।

महत्वपूर्ण जानकारी: इस सुनवाई का असर केवल सबरीमाला पर ही नहीं, बल्कि मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश और पारसी महिलाओं के अधिकारों जैसे अन्य धार्मिक मामलों पर भी पड़ सकता है।


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