संसद का बजट सत्र 2026-27: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव, बजट को लेकर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

संसद का बजट सत्र: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर तीखी बहस, 2026-27 के बजट को लेकर सत्ता–विपक्ष आमने-सामने
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🏛️ संसद का बजट सत्र: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर तीखी बहस, 2026-27 के बजट को लेकर सत्ता–विपक्ष आमने-सामने

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केंद्रीय बजट 2026-27 के संसद में पेश होने के बाद अब देश की सियासत का केंद्र राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बन गया है। बुधवार से संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की शुरुआत हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण का संदर्भ

बजट सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया था। अपने अभिभाषण में उन्होंने सरकार की बीते वर्षों की उपलब्धियों, आर्थिक सुधारों, सामाजिक कल्याण योजनाओं और “विकसित भारत” के लक्ष्य को रेखांकित किया।
राष्ट्रपति के इस अभिभाषण पर संसद की परंपरा के अनुसार ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ लाया गया, जिस पर अब सदन में चर्चा हो रही है।

विपक्ष का आक्रामक रुख

धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की कमान विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने संभाली।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में बजट 2026-27 को “आंकड़ों का खेल” बताते हुए कहा कि इसमें महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की आय जैसे जमीनी मुद्दों का ठोस समाधान नहीं दिखता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास की बात तो करती है, लेकिन सामाजिक असमानता लगातार बढ़ रही है।

अखिलेश यादव ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि बजट में उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों की वास्तविक जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण रोजगार पर अधिक निवेश की मांग की और कहा कि केवल बड़े प्रोजेक्ट्स से आम जनता का जीवन नहीं बदलता।

सरकार का जवाब: “विकसित भारत का रोडमैप”

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सरकार की ओर से वित्त मंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने बजट को “ऐतिहासिक” करार दिया। सरकार का कहना है कि केंद्रीय बजट 2026-27 अगले 25 वर्षों के लिए भारत की आर्थिक दिशा तय करता है।
सरकार के अनुसार यह बजट बुनियादी ढांचे, डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा, स्टार्टअप्स और रोजगार सृजन पर विशेष जोर देता है। सत्तापक्ष ने यह भी कहा कि विपक्ष पुरानी राजनीति कर रहा है और देश की बदलती जरूरतों को समझने में असफल है।

लोकसभा और राज्यसभा में माहौल

लोकसभा में चर्चा के दौरान कई बार शोर-शराबा भी देखने को मिला। विपक्ष ने सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया, जबकि सत्तापक्ष ने विपक्ष पर नकारात्मक राजनीति करने की बात कही।
राज्यसभा में चर्चा अपेक्षाकृत संतुलित रही, जहां कुछ सदस्यों ने बजट के सकारात्मक पहलुओं के साथ-साथ रचनात्मक सुझाव भी रखे।

बजट 2026-27 के प्रमुख बिंदु चर्चा के केंद्र में

धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान जिन मुद्दों पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई, उनमें शामिल हैं:

  • रोजगार और कौशल विकास
  • कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
  • मध्यम वर्ग के लिए कर राहत
  • शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च
  • डिजिटल और हरित भारत की पहल

सरकार ने दावा किया कि बजट इन सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास सुनिश्चित करता है, जबकि विपक्ष का कहना है कि योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच अब भी बड़ा अंतर है।

राजनीतिक संदेश और आगे की राह

विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की यह चर्चा सिर्फ बजट तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक दलों की रणनीति को भी दर्शाती है।
सरकार “विकसित भारत” के नैरेटिव को मजबूत करना चाहती है, वहीं विपक्ष आम जनता से जुड़े मुद्दों को केंद्र में लाकर सरकार को घेरने की कोशिश में है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, संसद का बजट सत्र 2026-27 केवल आर्थिक दस्तावेजों की चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की राजनीतिक दिशा और प्राथमिकताओं का भी संकेत देता है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चल रही बहस से यह साफ है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर राजनीति और तेज होगी।

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