तुलसी पूजन दिवस 2025: देशभर में धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन, सोशल मीडिया पर दिखी खास सक्रियता



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आज, 25 दिसंबर 2025 (गुरुवार) को देश के कई हिस्सों में तुलसी पूजन दिवस (Tulsi Pujan Diwas) धार्मिक श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन क्रिसमस के साथ ही आता है और पिछले कुछ वर्षों में एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में उभरा है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय कार्यक्रमों तक, तुलसी के धार्मिक, आयुर्वेदिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया जा रहा है।
🔹 क्या है आज की मुख्य खबर?
देशभर में हिंदू समुदाय के लोग आज तुलसी पूजन दिवस मना रहे हैं। घरों में तुलसी के पौधों की विशेष पूजा की जा रही है, वहीं कई शहरों में सामूहिक आरती और पौध वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #TulsiPujanDiwas ट्रेंड करता दिखाई दे रहा है, जहां लोग पूजा की तस्वीरें, वीडियो और संदेश साझा कर रहे हैं।
🔹 तुलसी पूजन दिवस की पृष्ठभूमि
तुलसी पूजन दिवस को संगठित रूप से मनाने की शुरुआत वर्ष 2014 के आसपास मानी जाती है। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति में तुलसी के महत्व को उजागर करना और लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ना बताया जाता है।
कुछ संगठनों और संत-समूहों द्वारा इसे बढ़ावा दिया गया, जिनमें आसाराम बापू का नाम भी सामने आता है। समय के साथ यह दिन कई स्थानों पर सांस्कृतिक पहचान के रूप में मनाया जाने लगा।
🔹 पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज तुलसी पूजन के लिए विशेष समय निर्धारित किया गया है।
🔸 शुभ मुहूर्त
- सुबह: 8:00 बजे से 10:00 बजे तक
- शाम: 5:30 बजे से 7:00 बजे तक
🔸 पूजा विधि
- सुबह स्नान के बाद तुलसी के पौधे को जल अर्पित किया जाता है
- कुमकुम और चंदन लगाया जाता है
- शाम को घी का दीपक जलाकर 3 या 7 बार परिक्रमा की जाती है
🔸 मंत्र
- पूजा के दौरान “ॐ तुलस्यै नमः” मंत्र का जाप किया जा रहा है
🔹 तुलसी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों जैसे स्कंद पुराण और पद्म पुराण में तुलसी को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि तुलसी में माता लक्ष्मी का वास होता है।
आज के दिन तुलसी पूजन से:
- घर में सुख-समृद्धि आती है
- नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष दूर होते हैं
- मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त होता है
🔹 तुलसी का वैज्ञानिक और औषधीय महत्व
आयुर्वेद में तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। विशेषकर सर्दियों के मौसम में:
- तुलसी का काढ़ा या चाय रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
- सर्दी-खांसी और संक्रमण से बचाव
- पर्यावरण शुद्धिकरण में भी तुलसी का योगदान
तुलसी पूजन दिवस लोगों को तुलसी का पौधा लगाने और उसके संरक्षण के लिए भी प्रेरित करता है।
🔹 सोशल और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
तुलसी पूजन दिवस के अवसर पर कई धार्मिक गुरुओं, सामाजिक संगठनों और राजनेताओं ने लोगों को शुभकामनाएं दी हैं।
देश के विभिन्न शहरों में:
- सामूहिक तुलसी आरती
- तुलसी के पौधों का निःशुल्क वितरण
- सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम
जैसी गतिविधियां देखने को मिलीं।
🔹 क्रिसमस के साथ संयोग और सामाजिक चर्चा
चूंकि तुलसी पूजन दिवस 25 दिसंबर को मनाया जाता है, इसलिए इसे लेकर सामाजिक चर्चा भी होती रही है। कुछ वर्ग इसे भारतीय सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखते हैं, जबकि अन्य इसे विविधता में सह-अस्तित्व का उदाहरण मानते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे बहुधार्मिक देश में विभिन्न पर्वों का एक ही दिन मनाया जाना सांस्कृतिक समावेश का प्रतीक है।
🔹 पर्यावरण और संस्कृति से जुड़ा संदेश
तुलसी पूजन दिवस केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाने का संदेश भी देता है। तुलसी जैसे औषधीय पौधों को संरक्षित करना आज के समय में स्वास्थ्य और पर्यावरण—दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
25 दिसंबर 2025 को मनाया गया तुलसी पूजन दिवस भारतीय संस्कृति, आयुर्वेद और आध्यात्मिक परंपराओं की याद दिलाने वाला अवसर बनकर सामने आया है। पूजा-पाठ, सोशल मीडिया ट्रेंड और सामूहिक आयोजनों के जरिए लोगों ने तुलसी के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व को दोहराया। यह दिवस परंपरा, पर्यावरण और सांस्कृतिक चेतना को जोड़ने का प्रतीक बनता जा रहा है।








