COP30 ब्राज़ील में शुरू: जलवायु संकट से निपटने की दिशा में अहम मोड़

COP30 ब्राज़ील में शुरू: जलवायु संकट से निपटने की दिशा में अहम मोड़
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दुनिया भर की निगाहें इस समय COP30 पर हैं — यह सम्मेलन 10 से 21 नवंबर 2025 तक ब्राज़ील के अमेज़न क्षेत्र के शहर Belém में आयोजित हो रहा है।  इस बार सम्मेलन सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं है बल्कि जलवायु कार्रवाई के लिए “क्रियान्वयन मोड़” माना जा रहा है।

क्यों है COP30 का महत्व?

यह 30वीं बैठक है COP29 के बाद, और इसमें प्रमुख एजेंडा में शामिल हैं:

  • वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 °C तक सीमित करने का लक्ष्य।
  • राष्ट्रीय रूप से निर्धारित योगदान (NDCs) प्रस्तुत करना और उनकी गुणवत्ता सुधारना।
  • जलवायु वित्त (climate finance) और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मदद।
  • अमेज़न जैसे महत्वूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय/आदिवासी समुदायों के अधिकार।

ब्राज़ील द्वारा इसे अमेज़न क्षेत्र में आयोजित करना प्रतीकात्मक है — न केवल यह “हवादार” पृष्ठभूमि है, बल्कि यह दिखाता है कि वन, जैवविविधता और पारिस्थितिक तंत्र अब जलवायु चर्चा का केंद्र हैं।

ब्राज़ील वर्ष 2025 में इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और आयोजन स्थल है Belém, Pará राज्य। यह विस्तारपूर्वक समझने योग्य है कि मेज़बानी का चयन क्यों महत्वपूर्ण है — अमेज़न क्षेत्र में जलवायु जोखिम अधिक हैं, साथ ही स्थानीय समुदायों पर प्रभाव भी गहरा है।

प्रमुख विषय एवं एजेंडा

मेज़बानों ने “थीमैटिक डेज़” नामक कैलेंडर जारी किया है जिसमें 30 से अधिक विषय शामिल हैं — ऊर्जा, परिवहन, व्यापार, कार्बन बाज़ार, वित्त इत्यादि।
उदाहरण के लिए, वन संरक्षण को लेकर ब्राज़ील ने यह कहा है कि अमेज़न को सिर्फ उत्सर्जन स्रोत के रूप में नहीं बल्कि कार्बन सिंक के रूप में देखा जाए।

चुनौतियाँ

हालाँकि उम्मीदें अधिक हैं, लेकिन चुनौतियाँ कम नहीं हैं:

  • विकसित देशों द्वारा वित्तीय सहायता और नीतिगत भरोसे का सवाल बना हुआ है। अफ्रीकी देशों ने चेतावनी दी है कि पिछले सम्मेलनों ने अपेक्षित मदद नहीं दी। आयोजन स्थल Belém में होटल और आवास की कीमतें बहुत बढ़ीं हैं, जिससे कुछ देशों को प्रतिनिधिमंडल घटाना पड़ा।
  • ब्राज़ील पर यह दबाव है कि वह ऊर्जा और संसाधन नीतियों में सही दिशा दिखाए — अमेज़न के पास तेल एवं गैस अन्वेषण के विरोधाभासी कदम चर्चा का विषय हैं।

क्या उम्मीद की जा सकती है?

  • यह सम्मेलन “वादों” से आगे निकलकर निष्पादन-मोड़ (implementation turn) बन सके — यानी पुरानी प्रतिबद्धताओं को कार्रवाई में बदलने का अभियान।
  • वन-संबंधी वैश्विक पहल जैसे “ट्रॉपिकल फॉरेस्ट फॉरएवर” को गति मिल सकती है, जिससे अमेज़न जैसे इकोसिस्टम को समर्थन मिले।
  • प्राइवेट सेक्टर, नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ सकती है — क्योंकि आयोजनकर्ता ने कंपनियों एवं NGOs से कहा है कि वे Belém में आएँ और सक्रिय हिस्सा लें।

क्यों ‘बेलेम’ में हो रहा है?

Belém का चयन रणनीतिक था — अमेज़न के मुहाने पर स्थित यह शहर दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन केवल औद्योगिक देशों का मुद्दा नहीं है बल्कि उन स्थानों का भी है जहाँ प्रभाव सबसे तीव्र हैं।
यह स्थान “फ्रंटलाइन” की कहानी कहता है — जहाँ बाढ़, सूखा, जंगल कटाई, आदिवासी अधिकार जैसे संवेदनशील मामले हैं। इस प्रकार, COP30 को केवल चर्चा का मंच नहीं बल्कि प्रभावित समुदायों का मंच भी माना जा रहा है।

हमारा सम्बंध (भारत व दक्षिण एशिया के दृष्टिकोण से)

भारत सहित दक्षिण एशिया के देशों के लिए COP30 विशेष मायने रखता है क्योंकि:

  • ये क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अग्रिम शिकार हैं — जैसे बढ़ती तापमान, ग्लेशियर क्षय, तीव्र मानसून।
  • भारत प्राकृतिक वनों व जैवविविधता की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण देश है — ऐसे में अमेज़न जैसे वैश्विक इकोसिस्टम की चर्चा से हमें सीखने को बहुत है।
  • वित्तीय सहायताएँ, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अनुकूलन (adaptation) पर वैश्विक समझौते बन सकते हैं जिन्हें हम उपयोग कर सकते हैं।
  • आदिवासी व स्थानीय समुदायों की हिस्सेदारी, न्याय संगत (climate justice) दृष्टिकोण जैसी अवधारणाएँ इस सम्मेलन में प्रमुख हो रही हैं — भारत में भी ये मुद्दे अब केंद्र में हैं।

समाधान

COP30 सिर्फ एक समेलन नहीं बल्कि क्रिया-मंच बनने की दिशा में है — जहाँ “क्या किया जाए” की बजाय “क्या किया गया” का लेखा-जोखा होगा। ब्राज़ील मेजबान के रूप में उम्मीदें जगाता है कि अमेज़न को ग्लोबल एजेंडा में ला सके और वन-स्रोतों, स्थानीय-अधिकारों व वित्तीय समर्थन के माध्यम से बदलाव को गति दे सके।
हमारे लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि इस तरह के वैश्विक सम्मेलन का असर केवल वहाँ नहीं होगा — बल्कि नीति-निर्माण, निवेश, तकनीकी सहयोग, न्यायसंगत बदलाव सभी जगह महसूस होंगे।

जलवायु परिवर्तन को प्रभावी तौर पर कम करने का हमारा समय तेजी से कम हो रहा है। COP30 से निकलने वाले निर्णय अगले दशकों की दिशा तय कर सकते हैं।

 

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