मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप से 20 बच्चों की मौत हो गई है। सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रतिबंधित फॉर्मूले वाला सिरप बाजार में कैसे पहुंचा। इस घटना ने देश की दवा निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मध्य प्रदेश में एक बार फिर दवा सुरक्षा प्रणाली पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। राज्य में जहरीले कफ सिरप से अब तक 20 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, यह सिरप कथित रूप से एक निजी फार्मा कंपनी द्वारा बनाया गया था और इसमें प्रतिबंधित रासायनिक तत्व पाए गए हैं।
राज्य के उप मुख्यमंत्री ने मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। फिलहाल संबंधित फार्मास्युटिकल कंपनी के उत्पादन और वितरण लाइसेंस को निलंबित कर दिया गया है, और सिरप के सभी बैचों को बाजार से वापस मंगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि प्रतिबंधित फॉर्मूले वाला यह सिरप बाजार में कैसे बिक रहा था और इसके वितरण की निगरानी क्यों नहीं की गई। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सिरप में डायथिलीन ग्लाइकोल (DEG) नामक जहरीला रसायन मौजूद था — जो कई देशों में बच्चों की मौत का कारण बन चुका है।
इस घटना ने देश में दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और नियामक प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र सरकार ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को जांच में शामिल किया है और सभी राज्यों को कफ सिरप की गुणवत्ता जांचने के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने मृत बच्चों के परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा की है और अस्पतालों को ऐसे मामलों में तत्काल रिपोर्टिंग के लिए निर्देशित किया गया है।








