भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 38वें स्थान पर: नवाचार की ओर बढ़ते कदम
भारत ने हाल ही में ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) 2025 में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा जारी इस रिपोर्ट में भारत को 139 देशों में से 38वाँ स्थान मिला है। यह रैंकिंग भारत के लिए गर्व की बात है क्योंकि साल 2015 में भारत 81वें स्थान पर था। यानी पिछले एक दशक में भारत ने 43 पायदानों की शानदार छलांग लगाई है। इस सफलता का श्रेय मुख्य रूप से रिसर्च और डेवलपमेंट में बढ़ते निवेश, स्टार्टअप इकोसिस्टम के तेजी से उभरने और सरकार द्वारा नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों को दिया जा रहा है।
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स क्या है?
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) एक अंतरराष्ट्रीय मानक है जो किसी देश की नवाचार क्षमता और प्रदर्शन को मापता है। इसमें शिक्षा, अनुसंधान, टेक्नोलॉजी, उद्योग, डिजिटलाइजेशन और नीति-निर्माण जैसे कई पहलुओं को शामिल किया जाता है। इस इंडेक्स को विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) हर साल प्रकाशित करता है।
- इसमें देशों को 0 से 100 तक अंक दिए जाते हैं।
- यह इंडेक्स यह दिखाता है कि कोई देश किस हद तक विज्ञान, तकनीक और उद्योग में नए विचार पैदा कर रहा है और उन्हें बाजार में उतारने में सक्षम है।
भारत की रैंकिंग का सफर
भारत का सफर इस इंडेक्स में लगातार बेहतर होता रहा है।
- 2015: 81वाँ स्थान
- 2020: 48वाँ स्थान
- 2023: 40वाँ स्थान
- 2025: 38वाँ स्थान
यह प्रगति यह बताती है कि भारत अब नवाचार और टेक्नोलॉजी में पीछे नहीं है, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे बढ़ रहा है।
भारत की सफलता के पीछे मुख्य कारण
1. रिसर्च और डेवलपमेंट में निवेश
भारत में पिछले कुछ वर्षों में अनुसंधान और विकास (R&D) पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी कंपनियों ने भी शोध पर अधिक खर्च करना शुरू किया है। ISRO, DRDO, IITs, IISc जैसे संस्थानों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाई है।
2. स्टार्टअप इकोसिस्टम
भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। फिनटेक, एडटेक, हेल्थटेक, एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। “Startup India” जैसी योजनाओं ने युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित किया है।
3. सरकारी नीतियाँ और योजनाएँ
सरकार ने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) जैसी योजनाओं के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया है।
4. शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट
IITs, IIMs और नए विश्वविद्यालयों की स्थापना ने तकनीकी शिक्षा को नई दिशा दी है। साथ ही स्किल इंडिया मिशन ने युवाओं को रोजगार योग्य बनाने में मदद की है।
5. डिजिटल क्रांति
आधार, UPI, डिजिलॉकर और CoWIN जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को दिखाया बल्कि दुनिया के सामने एक नया मॉडल प्रस्तुत किया। इससे भारत को GII रैंकिंग में बढ़त मिली है।
भारत के लिए इसका महत्व
- वैश्विक छवि में सुधार – इस रैंकिंग से दुनिया को यह संदेश जाता है कि भारत केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि नवाचार का केंद्र भी है।
- विदेशी निवेश को आकर्षित करना – बेहतर रैंकिंग से भारत में विदेशी कंपनियाँ और निवेशक R&D और स्टार्टअप्स में पैसा लगाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
- रोजगार के अवसर – नवाचार आधारित उद्योगों और स्टार्टअप्स के बढ़ने से लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- सामाजिक और आर्थिक विकास – हेल्थ, एजुकेशन, एग्रीकल्चर और ऊर्जा क्षेत्र में नए आविष्कार समाज की समस्याओं को हल करने में मदद करेंगे।
चुनौतियाँ अब भी बाकी हैं
हालाँकि भारत ने बड़ी प्रगति की है, लेकिन कई चुनौतियाँ अब भी मौजूद हैं।
- अनुसंधान और विकास पर खर्च अभी भी जीडीपी के मुकाबले कम है।
- ग्रामीण इलाकों में डिजिटल और तकनीकी सुविधाओं की कमी है।
- विश्वविद्यालयों में रिसर्च को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
- बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता अभी सीमित है।
भविष्य की राह
भारत के लिए जरूरी है कि वह R&D पर खर्च को और बढ़ाए और विश्वविद्यालयों को रिसर्च का हब बनाए। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल खाई (Digital Divide) को कम किया जाए। नवाचार को केवल टेक्नोलॉजी तक सीमित न रखकर कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों तक पहुँचाना होगा।
भारत का ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2025 में 38वें स्थान पर पहुँचना यह साबित करता है कि देश तेज़ी से बदल रहा है और दुनिया के नवाचार मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। यह उपलब्धि न केवल सरकार और उद्योग जगत की मेहनत का नतीजा है, बल्कि देश के युवाओं की रचनात्मकता और स्टार्टअप संस्कृति की सफलता का प्रतीक भी है। आने वाले वर्षों में यदि भारत R&D निवेश को और बढ़ाए और शिक्षा-अनुसंधान को मजबूत करे, तो यह रैंकिंग और भी बेहतर हो सकती है और भारत 2030 तक टॉप 25 देशों की सूची में शामिल हो सकता है।








