भारत में उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू: संसद भवन में मतदान

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भारत की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम है, क्योंकि संसद भवन में उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले अपना वोट डालकर मतदान की शुरुआत की। चुनाव में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन और इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार बी. सुधर्शन आमने-सामने हैं।


उपराष्ट्रपति चुनाव क्यों है खास?

भारत का उपराष्ट्रपति, राज्यसभा का सभापति भी होता है। ऐसे में उपराष्ट्रपति का पद केवल औपचारिक नहीं बल्कि संसदीय प्रक्रियाओं के संचालन में बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस चुनाव के नतीजे से न केवल सत्ता पक्ष बल्कि विपक्ष की रणनीति पर भी बड़ा असर पड़ेगा।


उम्मीदवार कौन हैं?

  1. सी.पी. राधाकृष्णन (NDA उम्मीदवार)
    • दक्षिण भारत से आने वाले वरिष्ठ नेता।
    • लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई है।
    • एनडीए ने उन्हें मजबूत उम्मीदवार के तौर पर उतारा है।
  2. बी. सुधर्शन (INDIA ब्लॉक उम्मीदवार)
    • विपक्षी दलों के गठबंधन “इंडिया ब्लॉक” के संयुक्त उम्मीदवार।
    • कांग्रेस समेत कई दलों का समर्थन प्राप्त।
    • विपक्ष इस चुनाव को लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने की लड़ाई के तौर पर पेश कर रहा है।

क्षेत्रीय दलों का रुख

दिलचस्प पहलू यह है कि कई क्षेत्रीय दलों ने इस चुनाव से दूरी बना ली है। इन दलों का तटस्थ रुख चुनावी नतीजों पर सीधा असर डाल सकता है।

  • कुछ पार्टियाँ सत्ता पक्ष के साथ नहीं दिखना चाहतीं।
  • वहीं कुछ विपक्षी खेमे से भी दूरी बनाए हुए हैं।

इससे यह साफ है कि क्रॉस वोटिंग और स्वतंत्र वोटिंग चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभा सकती है।


उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया

भारत में उपराष्ट्रपति का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 66 के तहत होता है।

  • चुनाव केवल संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सांसदों द्वारा किया जाता है।
  • मतदान गुप्त बैलेट से होता है।
  • इसमें सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली (STV) का उपयोग किया जाता है।

इस प्रक्रिया से सुनिश्चित किया जाता है कि निर्वाचित उम्मीदवार बहुमत के समर्थन से उपराष्ट्रपति बने।


चुनाव नतीजों पर नज़र

चुनाव के नतीजे आने में कुछ ही समय लगेगा, लेकिन अभी से राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है।

  • अगर NDA का उम्मीदवार जीतता है, तो यह मोदी सरकार की संसदीय पकड़ को और मजबूत करेगा।
  • अगर INDIA ब्लॉक का उम्मीदवार जीतता है, तो यह विपक्ष के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाएगी।

भारत की राजनीति पर असर

उपराष्ट्रपति चुनाव का सीधा असर केवल राज्यसभा की कार्यवाही पर ही नहीं, बल्कि संसद के माहौल और विपक्ष–सत्ता पक्ष के रिश्तों पर भी पड़ सकता है।

  • एनडीए की जीत = संसद में और मजबूती।
  • विपक्ष की जीत = सत्ता पक्ष पर दबाव बढ़ेगा।

यह चुनाव 2025 की राजनीति के समीकरणों का संकेत भी देगा।


भारत में उपराष्ट्रपति चुनाव केवल संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है। सी.पी. राधाकृष्णन और बी. सुधर्शन के बीच कड़ी टक्कर ने इस चुनाव को और रोचक बना दिया है। अब देखना होगा कि संसद के सांसद किसे चुनते हैं और भारत के नए उपराष्ट्रपति कौन बनते हैं।


 


 

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