जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी, पाकिस्तान की हरकतों से बढ़ा तनाव

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नई दिल्ली/श्रीनगर, 5 सितंबर 2025 — जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेना ने अपना विशेष अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तेज़ कर दिया है। इस ऑपरेशन का मकसद घाटी और सीमावर्ती इलाकों में छिपे आतंकियों को पूरी तरह समाप्त करना है। सेना की ओर से बताया गया है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक क्षेत्र से आतंक का सफाया नहीं हो जाता। इस बीच सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान अपने नूर खान एयरबेस को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है। यह कदम भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक और तनाव का संकेत माना जा रहा है।


ऑपरेशन सिंदूर क्या है?

भारतीय सेना समय-समय पर आतंकवाद के खिलाफ अलग-अलग नामों से अभियान चलाती रही है। ऑपरेशन सिंदूर इन्हीं अभियानों में से एक है, जिसे खासतौर पर जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों और उनके सपोर्ट नेटवर्क को खत्म करने के लिए शुरू किया गया है।
इस अभियान में न सिर्फ आतंकियों की तलाश और मुठभेड़ शामिल है, बल्कि हथियारों की तस्करी, फंडिंग और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को भी रोकना इसका प्रमुख लक्ष्य है। सेना के सूत्रों का कहना है कि यह “लॉन्ग-टर्म ऑपरेशन” है, यानी इसे कुछ ही दिनों में खत्म नहीं किया जाएगा, बल्कि आतंकवाद की जड़ तक पहुँचने के लिए इसे जारी रखा जाएगा।


हालिया मुठभेड़ और कार्रवाई

पिछले कुछ दिनों में सुरक्षा बलों ने कई सफलताएँ हासिल की हैं। सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कई खूंखार आतंकी मारे गए और बड़ी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद किए गए।
सूत्र बताते हैं कि आतंकियों के पास से बरामद हथियारों पर पाकिस्तान की मिलिट्री फैक्ट्री के निशान मिले हैं, जो इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान की धरती से आतंक को लगातार समर्थन मिल रहा है।


पाकिस्तान का नूर खान एयरबेस और उसका महत्व

भारतीय खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट रिपोर्ट्स से पता चला है कि पाकिस्तान अपने पुराने नूर खान एयरबेस को फिर से तैयार कर रहा है। यह एयरबेस रावलपिंडी के पास स्थित है और ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान वायुसेना के लिए अहम ठिकाना रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एयरबेस को सक्रिय करने की कोशिश का सीधा मकसद भारत पर दबाव बनाना और जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को समर्थन देना हो सकता है। यदि यह कदम आगे बढ़ता है, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।


सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें

भारतीय सेना ने यह भी बताया है कि हाल के हफ्तों में सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें तेज़ हो गई हैं। पाकिस्तान की ओर से लॉन्च पैड्स पर बड़ी संख्या में आतंकियों की मौजूदगी देखी गई है। ये आतंकी भारतीय सीमा में घुसपैठ कर आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में हैं।
हालांकि भारतीय सेना ने आधुनिक तकनीक, ड्रोन और थर्मल इमेजिंग सिस्टम के ज़रिए घुसपैठ को काफी हद तक नाकाम किया है।


स्थानीय लोगों की भूमिका

ऑपरेशन सिंदूर में स्थानीय लोगों का सहयोग भी अहम माना जा रहा है। सेना और प्रशासन ने नागरिकों को भरोसे में लेते हुए उन्हें सुरक्षा और विकास की गारंटी दी है।
ग्रामीण इलाकों में “व्हीकल चेकिंग प्वाइंट्स” और सर्च ऑपरेशंस बढ़ा दिए गए हैं ताकि आतंकी नेटवर्क को सप्लाई और पनाह न मिल सके। कई जगहों पर ग्रामीणों ने भी आतंकियों की मौजूदगी की सूचना देकर सुरक्षा बलों की मदद की है।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

भारत में केंद्र सरकार ने इस ऑपरेशन को आतंकवाद के खिलाफ ज़ीरो-टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साफ कहा है कि “अब आतंकियों को कोई रियायत नहीं मिलेगी।”
वहीं, पाकिस्तान इस पूरे ऑपरेशन को कश्मीर में “मानवाधिकार उल्लंघन” बताने की कोशिश कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ आवाज़ उठा रहा है। लेकिन भारत का रुख साफ है—कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और यहाँ आतंकवाद को जड़ से समाप्त किया जाएगा।


अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

अमेरिका, यूरोप और कई अन्य देशों ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है। हालांकि कुछ मानवाधिकार संगठनों ने ऑपरेशन के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा एयरबेस को सक्रिय करने का प्रयास और सीमा पर गतिविधियाँ, दक्षिण एशिया में सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।


सुरक्षा बलों की रणनीति

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, CRPF और खुफिया एजेंसियाँ मिलकर काम कर रही हैं।

  • आतंकियों के ठिकानों पर सटीक हमले किए जा रहे हैं।
  • सीमा पार से आने वाले रास्तों पर सर्विलांस बढ़ाया गया है।
  • ड्रोन और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर आतंकियों की गतिविधियों पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
    सेना का कहना है कि ऑपरेशन का मकसद सिर्फ आतंकियों को मार गिराना नहीं, बल्कि उनकी पूरी सप्लाई चेन और फंडिंग नेटवर्क को तोड़ना है।

आने वाले दिनों की चुनौती

जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति और सीमा पार से लगातार समर्थन पाने के कारण आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने साफ संकेत दे दिया है कि भारत अब किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाला नहीं है।
सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि ऑपरेशन के दौरान आम नागरिकों को किसी भी तरह की परेशानी न हो और आतंकियों को स्थानीय समर्थन न मिले।


जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ चल रहा ऑपरेशन सिंदूर भारत की दृढ़ नीति और आतंकवाद पर करारे प्रहार का प्रतीक है। सेना ने अब तक कई बड़ी कामयाबियाँ हासिल की हैं और आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज़ हो सकता है।
पाकिस्तान की ओर से नूर खान एयरबेस को सक्रिय करने की कोशिश और सीमा पर घुसपैठ की घटनाएँ स्थिति को और जटिल बना रही हैं। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी परिस्थिति में अपने राष्ट्रीय हितों और नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।

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