भारत की आतंकवाद के प्रति ‘शून्य-सहिष्णुता’ की नीति: राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर प्रकाश डाला, वैश्विक एकता का आह्वान किया
नई दिल्ली: भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी ‘शून्य-सहिष्णुता’ की नीति को दृढ़ता से दोहराया है, जिसका प्रमाण हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में देखने को मिला है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को ‘मानवता पर एक अभिशाप’ बताते हुए वैश्विक समुदाय से इसे जड़ से खत्म करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है।
आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट रुख:
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विभिन्न मंचों पर स्पष्ट किया है कि आतंकवाद किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती है।
यह शांति, विकास और लोकतंत्र जैसे मूल मानवीय मूल्यों का दुश्मन है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद एक कट्टर सोच का नतीजा है, जो सिर्फ भय, नफरत और विनाश फैलाता है।
उनका कहना है कि यह भ्रम तोड़ना जरूरी है कि कोई आतंकवादी ‘स्वतंत्रता सेनानी’ हो सकता है; इतिहास ने बार-बार सिद्ध किया है कि आतंकवाद हमेशा विनाशकारी रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद के खिलाफ भारत का दृढ़ संकल्प:
राजनाथ सिंह ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना करते हुए इसे भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति, सैन्य शक्ति और आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति का प्रमाण बताया। यह ऑपरेशन 7 मई, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को हुए भीषण आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी।
‘ऑपरेशन सिंदूर‘ के तहत, भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में नौ आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने के उद्देश्य से यह ऑपरेशन शुरू किया था और इसमें कभी भी आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया गया। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत की सैन्य कार्रवाई की गूंज रावलपिंडी तक सुनी गई, जहां पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय स्थित है। यह ऑपरेशन उरी में सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा के बाद बालाकोट हवाई हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ भारत के निर्णायक कदमों की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण कड़ी है।
वैश्विक एकता का आह्वान:
सिंह ने वैश्विक समुदाय से आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा मानकर एकजुट होने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ना एक सामूहिक जिम्मेदारी है, न कि एक विकल्प, और पूरी दुनिया को मिलकर आतंकवाद के इस दानव को खत्म करना होगा। उनका यह भी कहना है कि ‘बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ संभव नहीं हैं’, और भविष्य में पाकिस्तान के साथ किसी भी वार्ता का केंद्र आतंकवाद और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) ही रहेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, भारत ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को राष्ट्रीय रक्षा नीति का हिस्सा बना लिया है, और यह ‘नया भारत’ सीमा के भीतर और पार दोनों जगह आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है।
- आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई, केवल सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का हिस्सा है: रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह जी – Rajnath Singh Official Website




