जब पंडितजी देंगे गवाही, तब हो सकेगा विवाह पंजीकृत -:
परिवार की मर्जी के बिना गुपचुप विवाह कर पंजीकरण कराना अब युगलों के लिए आसान नहीं होगा। इसके लिए विवाह संस्कार संबंधी आधे-अधूरे साक्ष्य नहीं चल पाएंगे। पक्के साक्ष्य के साथ विवाह कराने वाले पंडित-पुरोहित आदि की भी गवाही अनिवार्य होगी। शनिदेव बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में महानिरीक्षक निबंधन समीर वर्मा ने विवाह पंजीकरण के संबंध में शुक्रवार को नये दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो उप्र विवाह पंजीकरण नियमावली 2017 में संशोधन होने या फिर नये नियमों के प्रभावी होने तक लागू रहेंगे।
न्यायालय द्वारा जारी अंतरिम निर्देश विशेषकर ऐसे युगलों के विवाह पंजीकरण के संबंध में जारी किए गए हैं, जिनके द्वारा अपने परिवार की सहमति के बिना विवाह किया गया है। नये दिशा-निर्देशों केप्रतीकात्मकअनुसार अब विवाह पंजीकरण के लिए उसी कार्यालय में आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, जहां वर अथवा बधू या फिर उनके माता-पिता सामान्य रूप से निवास कर रहे हों। निवास प्रमाणपत्र के तौर पर अपंजीकृत किरायानामा स्वीकार नहीं किया जाएगा। अभी तक इसी तरीके का युगल सबसे ज्यादा प्रयोग कर रहे थे।
पंजीकरण के समय विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहित या जिसकेद्वारा भी विवाह कराया है, उसको विवाह पंजीकरण अधिकारी के समक्ष भौतिक रूप में उपस्थिति अनिवार्य होगी। विवाह कराने वाले को एक शपथ पत्र भी अनिवार्य रूप से देना होगा, जिसमें शपथकर्ता का पूरा नाम, पिता का नाम, स्थायी पता, वर्तमान पता, आधार कार्ड की प्रति, कोई अन्य वैध पहचान पत्र, मोबाइल फोन नंबर, पुरोहित की अद्यतन पासपोर्ट आकार की फोटोग्राफ होगी जिससे शपथकर्ता की पहचान और प्रामाणिकता को स्थापित किया जा सके। शपथ पत्र में अनिवार्य रूप से यह भी घोषणा करनी होगी कि उनके द्वारा वर-वधू का विवाह संपन्न कराया गया है।
परिवारवालों की सहमति के बिना हुए विवाह या जिन मामलों में विवाह पंजीकरण के समय परिवार के सदस्य उपस्थित न हो, उनमें पंजीकरण के समय विवाह संस्कार की वीडियो रिकार्डिंग पेन ड्राइव में विवाह पंजीकरण अधिकारी द्वारा प्राप्त की जाएगी और उसे अग्रिम आदेशों तक कार्यालय मेंसंरक्षित किया जाएगा।
वहीं ऐसे विवाह पंजीकरण, जिनमें परिवार के सदस्य विवाह पंजीकरण के समय उपस्थित हों, उनमें विवाह पंजीकरण अधिकारी को यह विशेषाधिकार होगा कि यदि वह विवाह की प्रामाणिकता से संतुष्ट है तो आवेदकों को उक्त अंतरिम निर्देशों के अनुपालन से पूरी तरह या आंशिक मुक्ति प्रदान कर सकता है। इसमें परिवार के सदस्य से आशय माता-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी, पुत्र-पुत्री आदि प्रथम रक्त संबंध के बालिग पारिवारिक सदस्यों से है।
महानिरीक्षक निबंधन ने इस संबंध को गंभीरता से लेते हुए निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि कोर्ट के आदेश पर छह माह में विवाह पंजीकरण संबंधी नए नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस संबंध में महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनी हुई है।