जलवायु परिवर्तन 2026: बढ़ती चुनौतियां
नई दिल्ली/जिनेवा, 24 मार्च 2026: जलवायु परिवर्तन 2026 में दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। वैश्विक तापमान में तेज वृद्धि, असामान्य मौसमी घटनाएं और बढ़ते समुद्री जल स्तर ने तटीय देशों को खतरे में डाल दिया है।
2026 में जलवायु की स्थिति
विश्व मौसम संगठन (WMO) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 पृथ्वी के इतिहास में सबसे गर्म साल रहा। 2026 में भी यह ट्रेंड जारी है। आर्कटिक में बर्फ तेजी से पिघल रही है और समुद्री जल स्तर बढ़ रहा है।
- वैश्विक तापमान 1.5°C की सीमा के करीब पहुंचा।
- भारत में मानसून का पैटर्न बदल रहा है।
- हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।
- चक्रवात और बाढ़ की घटनाएं बढ़ी हैं।
भारत पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
भारत जलवायु परिवर्तन से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में से एक है। मानसून की अनियमितता, बढ़ती गर्मी, पानी की कमी और कृषि पर खतरे जैसी समस्याएं तेज होती जा रही हैं। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे तटीय शहरों पर बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है।
भारत की जलवायु नीति
भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। नवीकरणीय ऊर्जा में 500 GW क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर जोर है।
वैश्विक समझौते और प्रतिबद्धताएं
पेरिस समझौते के तहत सभी देशों ने कार्बन उत्सर्जन कम करने का वादा किया है, लेकिन विकसित देश अपने वादों पर खरे नहीं उतर रहे। 2026 में होने वाले COP-31 सम्मेलन में नए लक्ष्य तय किए जाएंगे।
HRAC News | 24 मार्च 2026 | पर्यावरण समाचार




